Edited By meena, Updated: 12 Feb, 2026 07:56 PM

दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक से कानून व्यवस्था और खनन नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में शिवनाथ नदी और आसपास के नदी घाटों, विशेषकर घसरा में, अवैध रेत...
धमधा (हेमंत पाल) : दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक से कानून व्यवस्था और खनन नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में शिवनाथ नदी और आसपास के नदी घाटों, विशेषकर घसरा में, अवैध रेत खनन पिछले करीब 20 दिनों से लगातार जारी रहने की जानकारी स्थानीय स्तर पर सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह होते ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए नदी से रेत निकालकर आसपास के गांवों में डंप किया जा रहा है, जिससे शासन को राजस्व हानि होने के साथ-साथ पर्यावरणीय नुकसान की भी आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और निगरानी की कमी के चलते रेत का अवैध कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायत करने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित रेत खनन से नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अवैध रेत खनन से नदी का बहाव बदल सकता है, तट कटाव बढ़ सकता है, जलस्तर गिर सकता है और जलीय जीवों का आवास प्रभावित होता है। इससे भविष्य में पेयजल और कृषि दोनों पर असर पड़ सकता है।

पत्रकारों को रेत माफिया ने दिया धमकी
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब अवैध खनन की जानकारी मिलने पर कवरेज करने पहुंचे स्थानीय पत्रकार हेमंत पाल और हेमंत उमरे ने आरोप लगाया कि रेत कारोबार से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि मौके पर मौजूद धनराज पटेल नामक व्यक्ति ने रेत से भरी ट्रॉली खाली कर जल्दबाजी में वहां से हटाने की कोशिश की। इस दौरान विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई और पत्रकारों को डराने-धमकाने का प्रयास और जान से करने का दिया धमकी ।
प्रशासन को सूचना, लेकिन कार्रवाई पर सवाल
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की सूचना पत्रकारों द्वारा तत्काल धमधा तहसीलदार और बोरी तहसीलदार को दी गई थी, लेकिन मौके पर कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इसे लेकर प्रशासनिक सक्रियता और फील्ड मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जा सकती थी।
तहसीलदार मीना साहू का पक्ष
धमधा तहसीलदार मीना साहू का कहना है कि उन्हें सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों को जानकारी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रेत खनन पर कार्रवाई करना संबंधित विभागों का दायित्व है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आधिकारिक बाइट देने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
राजनीतिक नाम के इस्तेमाल के आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ लोग राजनीतिक नामों का उपयोग कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि इस तरह की गतिविधियों से जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित हो सकती है।

पुलिस में शिकायत दर्ज
पत्रकारों द्वारा धमधा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। इस संबंध में धमधा थाना प्रभारी ध्रुवे ने बताया कि पत्रकारों की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है और मामले की जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जांच के बाद पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खनन और प्रशासन पर बड़े सवाल
क्षेत्र में लगातार अवैध खनन की शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई में देरी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो शिवनाथ नदी के अस्तित्व और आसपास के पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित करता है। कई मामलों में अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं और स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति पैदा होती है।
अब क्या होगा आगे
अब क्षेत्र में सबसे बड़े सवाल यह बनकर उभर रहे हैं
अवैध खनन पर कब सख्त कार्रवाई होगी
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या नहीं
पत्रकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी
खनन विभाग और प्रशासन की जवाबदेही कैसे तय होगी