Edited By meena, Updated: 12 Feb, 2026 02:33 PM

ग्वालियर की सियासत में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर आगमन के साथ ही प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट की सक्रियता बढ़ जाती है...
ग्वालियर (अंकुर जैन) : ग्वालियर की सियासत में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर आगमन के साथ ही प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट की सक्रियता बढ़ जाती है? यह सवाल तब और सुर्खियों में आ गया जब मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री सिलावट एक पत्रकार के तीखे सवाल पर असहज नजर आए। बता दें कि तुलसी सिलावट प्रशासनिक अमले के साथ बीते दिनों ग्वालियर जिले में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल के नुकसान को लेकर समीक्षा बैठक लेने पहुंचे थे। जहां उन्होंने किसानों को राहत राशि मुहैया कराने का ऐलान भी किया।
मीडिया के सवाल पर क्यों बढ़ी तल्खी?
दरअसल, एक पत्रकार ने प्रभारी मंत्री से पूछा कि ग्वालियर में किसान परेशान हैं, सड़कों की हालत खराब है और विकास कार्य नगण्य दिखाई दे रहे हैं। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि क्या उनका ग्वालियर दौरा केवल तब होता है जब ‘महाराज’ यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया शहर में आते हैं? इस सवाल ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। मंत्री के चेहरे के हाव-भाव से साफ झलक रहा था कि यह सवाल उन्हें नागवार गुजरा।
मंत्री का जवाब: “आप साल भर का चार्ट उठा कर देख लीजिए”
सवालों के जवाब में तुलसीराम सिलावट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि साल भर का दौरा कार्यक्रम देख लिया जाए, तब स्पष्ट हो जाएगा कि उन्होंने कितनी बार ग्वालियर का दौरा किया है। उन्होंने पत्रकार से कहा कि “प्रभारी मंत्री को निर्देश मत दीजिए, समस्या बताइए, उसका समाधान किया जाएगा।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका लेखा-जोखा उनकी पार्टी और सरकार रखती है, और ग्वालियर के हित में उठाए गए हर मुद्दे पर सरकार सजग है।
सियासी संकेत और जनता की उम्मीदें
मंत्री के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा सकता है, वहीं सत्ता पक्ष इसे अनावश्यक विवाद बता रहा है। लेकिन असली सवाल अब भी वही है—क्या ग्वालियर में विकास कार्यों की रफ्तार संतोषजनक है? जनता को दौरे की संख्या से ज्यादा जमीन पर दिखने वाले कामों की अपेक्षा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है या ग्वालियर में विकास की गति पर भी इसका असर पड़ता है।