Edited By Vikas Tiwari, Updated: 23 Feb, 2026 07:17 PM
Mohan Yadav ने सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) और एक सिनेरियस गिद्ध (Aegypius monachus) शामिल हैं।
भोपाल: Mohan Yadav ने सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) और एक सिनेरियस गिद्ध (Aegypius monachus) शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ और तेंदुओं की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है, वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं, जिनमें प्रवासी प्रजातियां भी शामिल हैं। बताया गया कि इन पांचों गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया। इन्हें उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटर से टैग किया गया है। यह प्रक्रिया वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में पूरी की गई। सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के तहत 30 से अधिक देशों तक लंबी दूरी का प्रवास करते हैं। यह पहल मध्य भारत के विकसित होते “गिद्ध परिदृश्य” को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वन विभाग ने WWF-India और Bombay Natural History Society के सहयोग से उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम शुरू किया है। इससे गिद्धों की गतिविधियों, आवागमन, भोजन क्षेत्रों और जोखिम वाले इलाकों की सटीक पहचान की जा सकेगी। गिद्ध पर्यावरण के सफाईकर्मी माने जाते हैं और बीमारियों के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रामायण में जटायु और सम्पाती की कथा गिद्धों के साहस और त्याग का प्रतीक मानी जाती है। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है। कार्यक्रम में डॉ. प्रभुराम चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।