Edited By Vikas Tiwari, Updated: 16 Jan, 2026 05:50 PM

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से वन विभाग को हिलाकर रख देने वाली शिकायत सामने आई है। दक्षिण सिवनी वनमंडल के उपवनमंडल अधिकारी पर फर्जी ट्रांजिट परमिट, अवैध सागौन कटाई, घूसखोरी और कर्मचारियों को प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत उच्च स्तर...
सिवनी (अब्दुल काबिज खान): मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से वन विभाग को हिलाकर रख देने वाली शिकायत सामने आई है। दक्षिण सिवनी वनमंडल के उपवनमंडल अधिकारी पर फर्जी ट्रांजिट परमिट, अवैध सागौन कटाई, घूसखोरी और कर्मचारियों को प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है और अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं।

यह मामला सिवनी जिले के दक्षिण वनमंडल से जुड़ा है। शिकायत में उपवनमंडल अधिकारी (सा.) सिवनी योगेश पटेल पर पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर फर्जी ट्रांजिट परमिट—यानी टीपी—जारी की गईं। शिकायत के अनुसार, जबलपुर फॉर्म फैक्टर के नियमों की अनदेखी कर निजी खसरों से कटाई में वास्तविक अनुमान से कई गुना अधिक लकड़ी दर्शाई गई। आरोप है कि इसके बदले प्रति घनमीटर भारी रकम की अवैध वसूली हुई, जिससे शासन को राजस्व का नुकसान और जंगलों को गंभीर क्षति पहुंची।
पत्र में वानिकी कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का भी दावा किया गया है। आरोप है कि स्वीकृत बजट का केवल 30 से 40 प्रतिशत खर्च कर कार्य पूर्ण कराने का दबाव बनाया गया। कर्मचारियों से कहा गया कि शेष राशि वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचानी है। इस दौरान फर्जी श्रमिक खातों से धन निकासी के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि जो कर्मचारी इन गतिविधियों का विरोध करते हैं, उन्हें धमकाया जाता है। वेतन कटौती, गोपनीय प्रविष्टि खराब करने और सेवा प्रभावित करने की चेतावनियों का आरोप लगाया गया है। यहां तक कि शराब के सेवन के बाद दुर्व्यवहार और गाली-गलौच की बातें भी शिकायत में दर्ज हैं। मामले ने और गंभीर रूप तब ले लिया जब वनरक्षक अजय जैन, बीट सिमरिया, की मृत्यु को भी इससे जोड़ा गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अवैध गतिविधियों का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। बाद में उनका ब्रेन हेमरेज से निधन हो गया। इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
शिकायत में महिला कर्मचारियों से दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं। मुख्यालय में जबरन रुकने का दबाव, गोपनीय प्रविष्टि खराब करने की धमकी और अनुचित संवाद जैसे गंभीर बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। यह शिकायत मुख्यमंत्री, वन मंत्री, मुख्य वनसंरक्षक भोपाल, लोकायुक्त, कलेक्टर सिवनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि डर के माहौल के कारण कई कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं।