सीधी का खड्डी महाविद्यालय बना खतरे का स्कूल! छत टपकती, दीवारों में दरारें, सांपों के बीच पढ़ाई

Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jan, 2026 11:53 AM

sidhi s khaddi college has become a dangerous school

जिले के रामपुर नैकिन ब्लॉक अंतर्गत स्थित खड्डी महाविद्यालय वर्ष 2023 में खोला गया था।

सीधी। (सूरज शुक्ला): जिले के रामपुर नैकिन ब्लॉक अंतर्गत स्थित खड्डी महाविद्यालय वर्ष 2023 में खोला गया था। प्रारंभिक संचालन के लिए इसे खड्डी हायर सेकेंडरी स्कूल के चार कमरों वाला भवन उपलब्ध कराया गया। इनमें से एक कमरा कार्यालय के लिए तथा तीन कमरे स्नातक कक्षाओं—बीए, बीकॉम एवं बीएससी—के संचालन हेतु निर्धारित किए गए।

हालांकि, कक्षाओं के लिए उपलब्ध कराए गए तीनों कमरों की स्थिति पूरी तरह जर्जर पाई गई। इनमें से दो कमरों में मौजूद गड्ढों को शिक्षकों द्वारा मिट्टी भरवाकर किसी तरह छात्र-छात्राओं के बैठने योग्य बनाया गया, लेकिन तीसरा कमरा अत्यधिक जर्जर अवस्था में है। कमरे की दीवारों में दरारें हैं, फर्श में गड्ढे हैं और छत इतनी कमजोर है कि बारिश के दौरान लगातार पानी टपकता रहता है। ऐसे में इस कमरे में कक्षा संचालित करना संभव नहीं हो सका।

इसी कारण 265 छात्र-छात्राओं वाला यह महाविद्यालय मात्र दो कमरों तक सीमित होकर रह गया है।

छात्रा की पीड़ा

बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा शिखा पांडेय ने बताया कि महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “बरसात में ऊपर से छत टपकती है, फर्श में एक-दो फीट तक के गड्ढे हैं, जिन्हें सर लोग मिट्टी डालकर भरवाते हैं। लैब की कोई व्यवस्था नहीं है, बैठने की भी समस्या रहती है। यहां सांप निकलते रहते हैं। सर लोग तीन-चार बार भवन निर्माण के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन जमीन की समस्या के कारण न कॉलेज बन पा रहा है और न सुविधाएं मिल पा रही हैं।

PunjabKesariप्राध्यापक का बयान

महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अजय सिंह गहरवार ने बताया कि खड्डी महाविद्यालय अगस्त 2023 से खड्डी स्कूल परिसर में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा, “प्रशासन द्वारा हमें तीन कमरे कक्षाओं के लिए और एक कमरा परीक्षा कार्यालय के लिए दिया गया था, लेकिन सभी कमरे जर्जर अवस्था में थे। हमने अपने स्तर पर दो कमरों की मरम्मत करवाई और मिट्टी पटवाकर उन्हें उपयोग योग्य बनाया। एक कमरा इतना खराब था कि उसकी मरम्मत संभव ही नहीं थी।

उन्होंने आगे बताया कि शासन से प्राप्त कुर्सी-टेबल उन्हीं दो कमरों में किसी तरह व्यवस्थित करवाई गई हैं।
“महाविद्यालय में कुल 265 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 50–60 छात्र प्रतिदिन कक्षाओं में आते हैं, लेकिन बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाती। बारिश के समय दीवारों की दरारों से कीड़े-मकोड़े और सांप निकल आते हैं, जिससे बच्चों को सावधानीपूर्वक बैठने की हिदायत दी जाती है।

प्रशासनिक लापरवाही का आरोप

डॉ. गहरवार ने बताया कि महाविद्यालय भवन के लिए उच्च शिक्षा विभाग से लेकर कलेक्टर महोदय तक कई बार पत्राचार किया गया। कलेक्टर द्वारा एसडीएम को निर्देश दिए गए, एसडीएम ने तहसीलदार को निर्देशित किया, तहसीलदार द्वारा एक-दो बार सर्वे भी किया गया, लेकिन अब तक भूमि आवंटन नहीं हो सका।

उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के अन्य नए महाविद्यालयों—विशेषकर रीवा संभाग और विंध्य क्षेत्र—में भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन खड्डी महाविद्यालय एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां आज तक भूमि आवंटित नहीं की गई। इसमें स्पष्ट रूप से प्रशासनिक उदासीनता दिखाई देती है।

बड़ा सवाल

सीधी जिला मुख्यालय से मात्र 50 किलोमीटर दूर स्थित खड्डी महाविद्यालय आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। जर्जर भवन में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सीधी जिला प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर जल्द भूमि आवंटित कर महाविद्यालय की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाएगा?

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