Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Jan, 2026 11:55 PM

जहां एक ओर पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस गर्व और उत्साह के साथ मना रहा था
मैहर: जहां एक ओर पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस गर्व और उत्साह के साथ मना रहा था, वहीं मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने इंसानियत और सिस्टम दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के शासकीय हाई स्कूल भटिगंवा में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष मिड-डे मील में बच्चों को थाली या पत्तल नहीं, बल्कि रद्दी कॉपियों और किताबों के फटे पन्नों पर भोजन परोसा गया।
कागज पर निवाला, जमीन पर बैठे मासूम
स्कूल परिसर में जमीन पर बैठे छात्र-छात्राओं के सामने न कोई प्लेट थी, न पत्तल। पुरानी कॉपियों और किताबों के स्याही लगे पन्ने फाड़कर जमीन पर बिछाए गए और उन्हीं पर हलुआ व पूड़ी परोस दी गई।
बच्चे मजबूरी में उसी गंदे कागज पर खाना खाते नजर आए।
स्याही वाला खाना, सेहत के लिए ज़हर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अखबार या लिखे हुए कागज पर खाना खाना बेहद खतरनाक है। प्रिंटिंग स्याही में लेड और जहरीले रसायन होते हैं, जो गर्म भोजन के संपर्क में आकर शरीर में जा सकते हैं और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की सेहत की कोई चिंता नहीं की।
बजट होने के बावजूद लापरवाही क्यों?
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के लिए बर्तन और पत्तल की व्यवस्था हेतु सरकार अलग से बजट देती है। फिर भी राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर इस तरह की अव्यवस्था ने स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या बच्चों को सम्मान के साथ भोजन कराना भी सिस्टम के बस की बात नहीं है? उन्होंने मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।