Edited By Desh Raj, Updated: 15 Mar, 2026 08:20 PM

छत्तीसगढ़ के होमगार्डों जवानों के पक्ष में एक ऐसा फैसला आया है जो काफी ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने छत्तीसगढ़ के 8,500 होमगार्डों जवानों को एक बड़ी राहत प्रदान की है।
(बिलासपुर): छत्तीसगढ़ के होमगार्डों जवानों के पक्ष में एक ऐसा फैसला आया है जो काफी ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने छत्तीसगढ़ के 8,500 होमगार्डों जवानों को एक बड़ी राहत प्रदान की है।दरअसल न्यायालय ने ‘समान काम-समान वेतन’ के सिद्धांत के आधार पर नगर सैनिकों को पुलिस कर्मियों के समकक्ष वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। इस फैसले के बाद होमगार्डों में काफी खुशी देखी जा रही है। उन्होंने अपने हक के लिए काफी लड़ाई लडी है।
सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज
यहीं नही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज करते हुए आदेश का पालन तीन महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है। साल 2022 में बिलासपुर जिले में कार्यरत होमगार्ड ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर समान काम के लिए समान वेतनमान की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को समान वेतनमान देने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन न करने पर होमगार्ड के दो जवानों ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।
लेकिन राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील दायर की, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। फिर छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए होमगार्डों के पक्ष में बड़ा फैसला दिया।
नगर सैनिक का मिलता है इतना मानदेय
आपको बता दें कि नगर सैनिकों को दैनिक मजदूरी के आधार पर भुगतान होता है, जो करीब 23,000 रुपये प्रतिमाह तक बैठता है। भत्तों को मिलाकर 33,200 तक पहुंच जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महंगाई भत्ते में भी इजाफा होगा। होमगार्ड के जवानों को इस फैसले के बाद आर्थिक सुरक्षा, पारिवारिक लाभ,चिकित्सा और आवास के साथ ही अन्य भत्ते भी मिलेंगे। जाहिर सी बात है कि नगर सैनिकों के जीवन में काफी सुधार आएगा।