Edited By meena, Updated: 12 Jan, 2026 01:15 PM

संघ और संगठन की सहमति के बाद मोहन यादव सरकार निगम–मंडलों और प्राधिकरणों में अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर अंतिम चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक पहली सूची तैयार है जिसमें प्रदेश ...
भोपाल : संघ और संगठन की सहमति के बाद मोहन यादव सरकार निगम–मंडलों और प्राधिकरणों में अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर अंतिम चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक पहली सूची तैयार है जिसमें प्रदेश के 12 से अधिक बड़े निगम–मंडलों और प्राधिकरणों में अध्यक्षों की ताजपोशी की जाएगी। इसके लिए पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया, कमल पटेल, रामनिवास रावत और इमरती देवी सहित करीब 12 नेताओं के नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है।
सीएम मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संघ पदाधिकारियों के बीच इन नामों पर कई दौर की चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि दिल्ली स्तर से भी इन नामों पर मुहर लग चुकी है। ऐसे में कभी भी नियुक्तियों से जुड़े आदेश जारी हो सकते हैं।
रामनिवास रावत ने जिम्मेदारी लेने से किया इनकार
वहीं राजनीतिक सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि पूर्व मंत्री रामनिवास रावत का नाम निगम–मंडल अध्यक्षों की सूची में शामिल बताया जा रहा था, लेकिन उन्होंने फिलहाल किसी भी जिम्मेदारी को लेने से इनकार कर दिया है। इसकी वजह विजयपुर विधानसभा सीट से जुड़े उपचुनाव को लेकर चल रही न्यायिक प्रक्रिया बताई जा रही है। रावत को उम्मीद है कि फैसला उनके पक्ष में आ सकता है, इसी कारण वे किसी नई जिम्मेदारी से दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि, इस दावे में कितनी सच्चाई है, यह आने वाला समय ही स्पष्ट करेगा।
मंत्री पद से वंचित विधायकों को मिल सकता है सम्मान
ऐसे विधायक जिनके नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में थे, लेकिन जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, उन्हें अब निगम–मंडलों और प्राधिकरणों में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की तैयारी है। पार्टी संगठन का मानना है कि इससे क्षेत्रीय असंतोष को भी संतुलित किया जा सकेगा। संभावित नामों में शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अजय बिश्नोई और अर्चना चिटनीस शामिल बताए जा रहे हैं।
संभावित सूची में कई चेहरे
इसके अलावा संभावित अध्यक्षों की सूची में भाजपा नेता ओम जैन, चेतन सिंह, अर्चना चिटनीस, विधायक अजय बिश्नोई, पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह, अशोक जादौन और अनूप भदौरिया जैसे नाम भी सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम सूची को मंजूरी दी जाएगी। निगम–मंडलों में नियुक्तियों के आदेश जारी होते ही प्रदेश की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल सकती है।