Edited By Himansh sharma, Updated: 22 Jul, 2026 04:59 PM

दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार चुनावी मुकाबला सिर्फ सभाओं और जनसभाओं तक सीमित नहीं है।
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार चुनावी मुकाबला सिर्फ सभाओं और जनसभाओं तक सीमित नहीं है। अब चुनावी रणनीति खेत-खलिहानों तक पहुंच गई है। भाजपा और कांग्रेस से जुड़े नेताओं के किसानों के साथ खेतों में ट्रैक्टर चलाने और खेती के कार्यों में हिस्सा लेने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो के बाद क्षेत्र में 'ट्रैक्टर पॉलिटिक्स' की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के भतीजे नितिन तिवारी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे ग्राम लमायचा में किसान निर्मल यादव के साथ ट्रैक्टर चलाते हुए धान की रोपाई में सहयोग करते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के बीच उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है।
इससे पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का भी एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में वे ग्राम सोनार में किसान कालीचरण पटेल के खेत में ट्रैक्टर चलाते नजर आए। दोनों वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तुलना का दौर शुरू हो गया है और यूजर्स इसे चुनावी प्रचार की नई शैली बता रहे हैं।
किसानों के बीच पहुंचने की होड़
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ग्रामीण मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाने के लिए इस बार नेताओं ने पारंपरिक चुनावी सभाओं के साथ खेतों का भी रुख किया है। किसान परिवारों के बीच जाकर खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने की तस्वीरें और वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंच रहे हैं, जिससे चुनाव प्रचार का तरीका भी बदलता नजर आ रहा है।
सोशल मीडिया बना चुनावी अखाड़ा
दतिया उपचुनाव में अब सोशल मीडिया भी चुनावी प्रचार का अहम मंच बन चुका है। नेताओं के भाषणों से ज्यादा उनके अलग-अलग अंदाज वाले वीडियो चर्चा बटोर रहे हैं। कोई इसे किसानों से जुड़ने की कोशिश बता रहा है तो कोई इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है। हालांकि इन वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। फिलहाल इतना तय है कि दतिया उपचुनाव में इस बार ट्रैक्टर पॉलिटिक्स' चुनावी चर्चा का नया विषय बन चुकी है और खेतों से लेकर सोशल मीडिया तक इसकी खूब चर्चा हो रही है।