Edited By Desh sharma, Updated: 20 Jan, 2026 05:22 PM

सीधी जिले में रेल सुविधाओं की अनदेखी को लेकर अब जनाक्रोश खुलकर सड़कों से लेकर रेल पटरियों तक उतरने जा रहा है। शंकरपुर भदौरा रेलवे स्टेशन पर इंटरसिटी ट्रेन के स्थायी स्टॉपेज और स्टेशन को पूर्ण दर्जा दिलाने की मांग को लेकर बुधवार 28 जनवरी को ऐतिहासिक...
सीधी (सूरज शुक्ला): सीधी जिले में रेल सुविधाओं की अनदेखी को लेकर अब जनाक्रोश खुलकर सड़कों से लेकर रेल पटरियों तक उतरने जा रहा है। शंकरपुर भदौरा रेलवे स्टेशन पर इंटरसिटी ट्रेन के स्थायी स्टॉपेज और स्टेशन को पूर्ण दर्जा दिलाने की मांग को लेकर बुधवार 28 जनवरी को ऐतिहासिक जेल भरो आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में कुसमी और मझौली अंचल से करीब 5000 लोग स्वेच्छा से गिरफ्तारी देकर शासन और रेल प्रशासन का ध्यान आकर्षित करेंगे।
इस सर्वदलीय एवं गांधीवादी आंदोलन के संयोजक आनंद सिंह (ददुआ) ने बताया कि यह लड़ाई केवल एक स्टेशन या ट्रेन के ठहराव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्षों से रेल प्रशासन द्वारा आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी उपेक्षा के विरोध में अब जनता ने सामूहिक गिरफ्तारी का रास्ता चुना है।
रेल संघर्ष समिति का कहना है कि कोरोना काल में क्षेत्र से गुजरने वाली चार पैसेंजर ट्रेनें बंद कर दी गईं, जिससे ग्रामीण अंचल लगभग रेल मानचित्र से कट गया। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जबलपुर जैसे बड़े शहरों तक पहुंचने में घंटों की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है। विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए भी रेल सुविधा जीवनरेखा साबित हो सकती है, लेकिन इंटरसिटी स्टॉपेज न होने से उन्हें निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में इंटरसिटी ट्रेन का नियमित ठहराव, शंकरपुर भदौरा स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा और शासकीय स्टेशन मास्टर की पदस्थापना शामिल है। उनका कहना है कि यदि 5000 लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।