Edited By meena, Updated: 12 Feb, 2026 05:54 PM

वैलेंटाइन डे से पहले मध्य प्रदेश में माहौल एक बार फिर गरमा गया है। ये माहौल एक पोस्टर से गरमाया है जिसमें खुले तौर पर चेतावनी दी गई है- 'जहां दिखे बाबू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना'...
सागर : वैलेंटाइन डे से पहले मध्य प्रदेश में माहौल एक बार फिर गरमा गया है। ये माहौल एक पोस्टर से गरमाया है जिसमें खुले तौर पर चेतावनी दी गई है- 'जहां दिखे बाबू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना'। दरअसल, मध्य प्रदेश में विहिप, बजरंग दल, शिवसेना कार्यकर्ताओं समेत कई अन्य सामाजिक संगठन 14 फरवरी को आने वाले वैलेंटाइन डे का विरोध कर रहे हैं। इंदौर के बाद सागर में पश्चिमी संस्कृति के विरोध में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पोस्टरों के जरिए चेतावनी जारी की है। कार्यकर्ताओं ने सागर जिले में सिविल लाइन स्थित पहलवान बाबा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘लट्ठ पूजन’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन के जरिए 14 फरवरी को सार्वजनिक स्थानों पर कथित अश्लीलता बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी गई।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘लट्ठ पूजन’
कार्यक्रम में पंडित-पुरोहित की मौजूदगी में विधि-विधान से लाठियों का पूजन किया गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि लट्ठों पर चमेली और सरसों का तेल चढ़ाया गया, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग “पूरी ताकत” से किया जा सके। शिवसैनिकों ने इसे भारतीय संस्कृति की रक्षा का प्रतीक बताया। उनका तर्क है कि वैलेंटाइन डे जैसे आयोजनों से भारतीय परंपराओं पर असर पड़ता है और इसे रोकना जरूरी है।
शहर में लगे चेतावनी भरे पोस्टर
लट्ठ पूजन के बाद शहर के पार्क, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य सार्वजनिक स्थलों के बाहर चेतावनी भरे पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर लिखा गया— “जहां मिलेंगे बाबू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना।” इन पोस्टरों के सामने आने के बाद शहर में बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे संस्कृति संरक्षण की पहल बता रहे हैं, तो वहीं कई नागरिक इसे डर और दबाव का माहौल बनाने की कोशिश मान रहे हैं।
समर्थन और विरोध के बीच प्रशासन की नजर
हर साल की तरह इस बार भी वैलेंटाइन डे को लेकर समर्थन और विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। प्रशासन की ओर से फिलहाल शांति व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि 14 फरवरी को शहर में हालात कैसे रहते हैं—क्या यह विवाद केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित रहेगा या फिर सड़कों पर टकराव की स्थिति बनेगी।