Edited By Vikas Tiwari, Updated: 18 Feb, 2026 04:12 PM

इस बार होली के रंग सिर्फ चेहरे नहीं, बल्कि सेहत और पर्यावरण भी खिलाएंगे। बस्तर जिले की बिहान दीदियां प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। यह पहल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य...
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): इस बार होली के रंग सिर्फ चेहरे नहीं, बल्कि सेहत और पर्यावरण भी खिलाएंगे। बस्तर जिले की बिहान दीदियां प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। यह पहल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
हर्बल गुलाल तैयार करने में सब्जियों और फूलों से प्राप्त प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है। पलाश के फूलों से केसरिया, पालक भाजी से हरा, लाल भाजी और चुकंदर से लाल रंग का गुलाल बनाया जा रहा है। इसके साथ गुलाब, गेंदा और पलाश की पंखुड़ियों, गुलाब जल और इत्र को मिलाकर इसे पूरी तरह प्राकृतिक और सुगंधित बनाया जा रहा है। इस गुलाल में किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जा रहा, जिससे यह त्वचा, आंख और बालों के लिए सुरक्षित है। जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित किया गया, जहां महिलाओं ने वैज्ञानिक तरीकों से प्राकृतिक रंग तैयार करना सीखा। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों से होने वाली एलर्जी और त्वचा रोगों को देखते हुए यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है। कॉर्न फ्लावर के बेस में प्राकृतिक अर्क मिलाकर तैयार किया जा रहा यह गुलाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली और चर्म रोग मुक्त है।
प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने इस वर्ष 500 से 1000 किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके विक्रय के लिए जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों, शासकीय कार्यालयों और स्थानीय बाजारों में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। बिहान की दीदियों के लिए यह सिर्फ रंग बनाने का काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की नई राह है। इस पहल से जहां महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, वहीं आम लोगों को भी सुरक्षित और खुशहाल होली मनाने का अवसर मिलेगा।