SC-ST विधायकों की हालत कुत्ते जैसी...कांग्रेस विधायक के विवादित बोल, गरमाई सियासत

Edited By meena, Updated: 14 Jan, 2026 05:15 PM

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अपने बेबाक अंदाज और बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं...

भोपाल : अपने बेबाक अंदाज और बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) समुदाय के जनप्रतिनिधियों की स्थिति को लेकर आपत्तिजनक और आपराधिक रूप से अस्वीकार्य शब्दों का प्रयोग किया है। यह बयान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस की ‘डिक्लेरेशन-2’ ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान दिया गया। खास बात यह है कि जिस मंच से यह बयान दिया गया, वहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम पर उठाए सवाल

मंच से संबोधन के दौरान विधायक बरैया ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम में शामिल होने के बाद SC/ST समुदाय के जनप्रतिनिधियों की स्थिति कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा- एससी-एसटी विधायकों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी हो गई है, ऐसे प्रतिनिधि न तो स्वतंत्र रूप से बोल पाते हैं और न ही अपने समाज के हितों के लिए प्रभावी भूमिका निभा पाते हैं। बरैया ने जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम को SC/ST समुदाय की समस्याओं की जड़ बताते हुए सेपरेट इलेक्टोरल सिस्टम की मांग की और कहा कि यही डॉ. अंबेडकर के सपनों को पूरा करने का रास्ता है।

आदिवासी समाज पर टिप्पणी भी विवादों में

इतना ही नहीं, विधायक बरैया ने आदिवासी समाज को लेकर भी बेहद विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि—

  • आदिवासियों को हिंदू न बनने दिया जाए
  • झारखंड की तर्ज पर ‘सरना धर्म’ को बढ़ावा दिया जाना चाहिए
  • उनका दावा था कि इससे ही आदिवासियों की “मुक्ति” संभव है

बरैया ने यह भी कहा कि जंगलों की कटाई से आदिवासी समाज के ज्ञान और जीवनशैली पर असर पड़ा है, और उनकी सामाजिक स्थिति को लेकर आपत्तिजनक सामान्यीकरण किया।

मंच पर मौजूद रहे दिग्विजय सिंह और अन्य नेता

यह पूरा बयान भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित बैठक में दिया गया, जहां दिग्विजय सिंह के साथ-साथ विक्रांत भूरिया जैसे नेता भी मंच पर मौजूद थे। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान किसी भी वरिष्ठ नेता की ओर से तत्काल सार्वजनिक आपत्ति दर्ज किए जाने की सूचना सामने नहीं आई है।

बरैया के बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि फूल सिंह बरैया का यह बयान न केवल राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई सामने आती है।

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