MP में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों पर बड़ा निर्देश, SC/ST/OBC के प्रतिनिधित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही अहम बात

Edited By Desh Raj, Updated: 10 Feb, 2026 11:54 PM

supreme court directive on sc st obc representation in government appointments

मध्य प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी( SC/ST/OBC) जैसे वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश सामने आया है। देश की शीर्ष कोर्ट ने प्रदेश में अदालतों में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों के संबंध दायर...

(डेस्क):मध्य प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी( SC/ST/OBC) जैसे वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश सामने आया है। देश की शीर्ष कोर्ट ने प्रदेश में अदालतों में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों के संबंध दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इनमें वंचित वर्गों को मौका देने को कहा।

सरकारी नियुक्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी जैसे वंचित वर्गों को मिले प्रतिनिधित्व का मौका

इसे एक बड़ा फैसला समझा जा रहा है। सरकारी नियुक्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी आदि वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट का ये निर्देश काफी अहम है। कोर्ट ने प्रदेश की अदालतों में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों के संबंध दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया।

हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया कि वैधानिक प्रावधान नहीं होने से इस मामले में बाध्यकारी निर्देश नहीं दिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने एमपी में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में वंचित समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने की एडवोकेट जनरल से अपेक्षा जताई।  दरअसल याचिका में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा की गई नियुक्तियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि इसमें (ST) वर्ग का एक भी वकील नहीं है। साथ ही कहा कि एससी, महिला और ओबीसी वकीलों की भागीदारी भी बहुत कम है।

अपने आदेश में पीठ ने कहा कि किसी वैधानिक आरक्षण प्रावधान के अभाव में वह बाध्यकारी निर्देश नहीं दे सकती, लेकिन महाधिवक्ता से अनुरोध करती है कि नियुक्तियों के दौरान हाशिए के समाज से आने वाले अधिवक्ताओं और महिलाओं का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया। वैसे कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हालांकि यह कानूनी अधिकार नहीं है लेकिन इन वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में इस पर विचार किया जाना चाहिए।

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