संबल योजना में करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाली महिला सहित 3 गिरफ्तार,घरवालों से लेकर रिश्तेदार सब कर दिए मालामाल

Edited By Desh Raj, Updated: 08 Feb, 2026 09:28 PM

3people involved in a multi crore fraud under the sambal scheme arrested

भिंड में संबल योजना में 3.40 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाली महिला सहित 3 को पुलिस ने  गिरफ्तार कर लिया है। भिंड नगर पालिका में संबल योजना के तहत करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आने के बाद ये कार्रवाई हुई है।  पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार...

भिंड( देवेश चतुर्वेदी): भिंड में संबल योजना में 3.40 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाली महिला सहित 3 को पुलिस ने  गिरफ्तार कर लिया है। भिंड नगर पालिका में संबल योजना के तहत करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आने के बाद ये कार्रवाई हुई है।  पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है,

दरअसल नगर पालिका भिंड में मध्य प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी संबल योजना के तहत करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था. इस मामले में पुलिस ने महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि घोटाले की कुल राशि करीब 3 करोड़ 40 लाख रुपये है. पुलिस के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से लंबे समय से चल रहा था, जिसमें दस्तावेजों में हेराफेरी कर फर्जी लाभार्थी बनाकर उनके नाम पर राशि स्वीकृत कराई जाती थी और बाद में यह राशि आरोपियों के रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी.

नगर पालिका बाबू राजेन्द्र चौहान मास्टरमाइंड

जांच में खुलासा हुआ है कि नगर पालिका में पदस्थ बाबू राजेन्द्र सिंह चौहान इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड था, वह पहले ही इसी घोटाले में गिरफ्तार होकर जेल में बंद है. पुलिस का कहना है कि राजेन्द्र चौहान ही अपने इन दलालों के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों को तैयार कराने, सत्यापन कराने और भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता था.

ऑनलाइन दुकान संचालक बनाता था फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र

पकड़े गए तीन आरोपियों में से एक जितेंद्र वर्मा है, जो ऑनलाइन दुकान चलाता था. पुलिस के अनुसार जितेंद्र वर्मा अपनी दुकान से संबल योजना के फर्जी लाभार्थियों के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करता था. इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर लाभार्थियों के नाम संबल योजना की राशि स्वीकृत होती थी इसके बाद स्वीकृत धनराशि को सीधे आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था. इस तरीके से लाखों रुपये का भुगतान कराया गया.

रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर हड़पते थे राशि

सीएसपी निरंजन सिंह राजपूत के मुताबिक सभी आरोपी घोटाले की रकम अपने नाम पर न लेकर रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे, ताकि जांच में आसानी से पकड़ में न आएं. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कई-कई बैंक खाते खुलवाकर उन्हें ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल किया

बैंक खातों में लाखों रुपये का लेन-देन

पुलिस जांच में बैंक खातों से जुड़ा बड़ा डेटा सामने आया है. आरोपी संतोष शाक्य के 10 बैंक खातों में करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. आरोपी मंजू अर्गल के 16 बैंक खातों में 32 लाख रुपये जमा कराए गए. वहीं, ऑनलाइन दुकान संचालक जितेंद्र वर्मा के खाते में 2 लाख रुपये और उसकी मां के खाते में भी 2 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए

इसमें से 17 लाख रुपये का हिस्सा नगर पालिका का बाबू मास्टरमाइंड राजेन्द्र सिंह चौहान के खाते में डाले गए. पुलिस के मुताबिक इन सभी खातों की जानकारी और व्यवस्था मुख्य आरोपी नगर पालिका बाबू राजेन्द्र चौहान द्वारा उपलब्ध कराई जाती थी. घोटाले की रकम इन्हीं खातों में डालकर धीरे-धीरे निकाली जाती थी.

दस्तावेजों में हेराफेरी कर बनाई गई फर्जी सूची

पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने संबल योजना के तहत ऐसे लोगों के नाम जोड़ दिए जो पात्र नहीं थे. कई मामलों में मृतक दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर राशि स्वीकृत कराई गई. दस्तावेजों में हेराफेरी कर नगर पालिका से भुगतान प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी.

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