Edited By meena, Updated: 10 Jun, 2026 01:41 PM

भूमि को लेकर सामने आए करोड़ों रुपये के विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पीड़ित पक्ष का दावा है कि विधिवत विक्रय अनुबंध हुआ...
मंदसौर (शाहरूख मिर्जा) : भूमि को लेकर सामने आए करोड़ों रुपये के विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पीड़ित पक्ष का दावा है कि विधिवत विक्रय अनुबंध हुआ, और सभी शर्तों का पालन करने की तैयारी भी है, वहीं दूसरी ओर आज तक भूमि की रजिस्ट्री नहीं होना पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।
यदि शिकायत में जमीर हुसैन अन्सारी के द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह केवल अनुबंध उल्लंघन का मामला नहीं बल्कि आम नागरिकों के भरोसे पर भी बड़ा सवाल है। आखिर जब लिखित अनुबंध मौजूद है, गवाह मौजूद हैं और जमीन का अल्टर लेन देन का दावा किया जा रहा है, तो फिर रजिस्ट्री में देरी क्यों हो रही है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव काम कर रहा है या फिर मामले को जानबूझकर उलझाया जा रहा है?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि पीड़ित पक्ष द्वारा पहले भी शिकायत किए जाने के बावजूद यदि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इसके पीछे क्या कारण हैं? क्या जांच की प्रक्रिया धीमी है या फिर मामला किसी प्रभाव के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा?

भूमि विवादों में धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के बीच यह मामला पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नजरें टिकाए हुए है। जनता जानना चाहती है कि यदि किसी व्यक्ति के पास अनुबंध और भुगतान के दस्तावेज हैं, तो उसे न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर हैं। निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो तथ्य भी सार्वजनिक होने चाहिए। न्याय और पारदर्शिता, दोनों की मांग इस मामले में बराबर महत्वपूर्ण है।
शिकायतकर्ता जमीर हुसैन अन्सारी ने मंदसौर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच के निर्देश जारी करने तथा दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।