Edited By Vandana Khosla, Updated: 03 Aug, 2026 11:43 AM

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल, आज यानी सोमवार को दतिया उपचुनाव के नतीजे घोषित होने जा रहे है। खास बात यह है कि नतीजों के बाद मोहन मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस दौरान नॉन-परफॉर्मिंग अफसरों...
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल, आज यानी सोमवार को दतिया उपचुनाव के नतीजे घोषित होने जा रहे है। खास बात यह है कि नतीजों के बाद मोहन मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस दौरान नॉन-परफॉर्मिंग अफसरों की छुट्टी होगी।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबे समय से जमें कई अफसरों को भी हटाया जा सकता है। दरअसल, इन अधिकारियों पर नॉन-परफॉर्मेंस के कारण गाज गिरेगी। जोकि केवल फाइलें साइन कराने तक ही सीमित रह गए। सूत्रों के मुताबिक, सीएम मोहन यादव न केवल मंत्रियों से बल्कि अधिकारियों से भी अपेक्षा करते हैं कि जनता के कल्याण के लिए काम किए जाए। दोनों ही मोर्चे पर जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत होने पर जोर दिया गया है। दरअसल, सरकार के मौजूदा कार्यकाल के केवल दो वर्ष ही शेष हैं। इनमें से एक वर्ष सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों और आयोजन में व्यस्त रहना लगभग तय है। इसी दौरान नगरीय निकाय चुनाव भी होने हैं।
ऐसे में सूत्रों का कहना है कि सरकार अब अगले दो वर्षों तक अघोषित रूप से चुनावी मोड में काम करेगी। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि करीब 22 वर्षों से (कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के संक्षिप्त कार्यकाल को छोड़कर) सत्ता में काबिज भाजपा के सामने कई ऐसी अदृश्य चुनौतियां हैं, जो समय के साथ कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही हैं।
वहीं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसानों समेत कई मामलों पर लोगों को और अपेक्षा है। युवा पीढ़ी सस्ती और गुणवत्तायुक्त शिक्षा चाहती है। लेकिन अब भी कक्षा 1 से 12वीं तक अच्छी और गुणवत्तायुक्त शिक्षा के अवसर कम हैं। मेडिकल व तकनीकी क्षेत्रों की पढ़ाई आम युवा की पकड़ से दूर है। कुछ को ही लाभ मिल रहा। इसके अलावा राज्य में आयुष्मान योजना और सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन आम मरीजों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है।
इधर युवाओं को रोजगार के अवसर कम मिल पा रहे हैं। आउटसोर्स को रोजगार उपलब्ध कराने की श्रेणी में शामिल कर रखा है, जिसमें 10 से 18 हजार रुपए मानदेय मिल रहा है, जो एक तरह से मजदूरी जैसा पैटर्न है। किसानों के लिए कई योजनाएं चल रही हैं लेकिन समर्थन मूल्य पर गेहूं, मूंग व धान बेचने समेत कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।