CHO ने आदिवासी महिला को बाल खींचकर पटका, बेहोश होने तक की मारपीट; VIDEO वायरल

Edited By Himansh sharma, Updated: 06 Feb, 2026 02:28 PM

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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है।

खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। पंधाना थाना क्षेत्र के टाकली कला गांव में गुरुवार को जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जहां बैडियावं में पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) मनीषा वासुले पर एक आदिवासी महिला को खेत में बाल पकड़कर पटकने, घसीटने और बेहोश होने तक पीटने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खेत में काम कर रही थी पीड़िता, CHO समर्थकों के साथ पहुंची

जानकारी के मुताबिक, ठाकुर रूस्तम, पिंकी बाई और कुंवर सिंह अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान CHO मनीषा वासुले कुछ लोगों के साथ मौके पर पहुंचीं और जमीन पर अपना दावा जताया। पिंकी बाई ने भी जमीन को अपनी बताते हुए खेत छोड़ने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया।

बाल खींचे, धक्का देकर गिराया, खेत में घसीटा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान CHO मनीषा वासुले ने पिंकी बाई को धक्का देकर गिराया, इसके बाद बाल पकड़कर खेत में घसीटा गया। मारपीट इतनी बेरहमी से की गई कि पीड़िता खेत में ही बेहोश हो गई। आरोप है कि CHO के साथ आए लोगों ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाने और दवा का छिड़काव करने की भी कोशिश की, जिसका महिलाओं ने विरोध किया तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

पीड़िता का आरोप: थाने में भी नहीं मिली राहत

पीड़िता पिंकी बाई ने बताया कि घटना के बाद CHO ने डायल-100 बुलवाई और पुलिस उन्हें थाने ले गई। आरोप है कि थाने में भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पिंकी बाई का कहना है कि महिला पुलिसकर्मी मनीषा गोयल ने गार्ड रूम में ले जाकर गला मरोड़ने की कोशिश की।

जमीन हड़पने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप

ठाकुर रूस्तम के परिवार का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2001 में ग्राम धनोरा निवासी पुटिया से 5 एकड़ जमीन खरीदी थी। बाद में 2019 में जमीन की नई कीमत के तौर पर 8 लाख रुपए भी दिए गए। परिवार का दावा है कि CHO मनीषा वासुले ने खुद को बैंक मैनेजर बताकर 2.5 लाख रुपए लोन चुकाने के नाम पर लिए, जबकि बाद में पता चला कि वही जमीन CHO ने अपने नाम करा ली।
परिवार ने वकीलों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिक्री एग्रीमेंट और रजिस्ट्री के नाम पर लाखों रुपए लिए गए, लेकिन जमीन उनके नाम ट्रांसफर नहीं हुई और केस में हेरफेर किया गया।

प्रशासन से शिकायत, फिर भी नहीं निकला समाधान

पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन विवाद को लेकर एसपी कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासनिक चुप्पी के चलते परिवार मानसिक तनाव में है।

पुलिस का बयान: दोनों पक्षों पर क्रॉस केस

बरगांव पुलिस चौकी प्रभारी राम प्रकाश यादव ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ क्रॉस-शिकायतें दर्ज की गई हैं। पुलिस का दावा है कि बल प्रयोग नहीं किया गया, बल्कि थाने में हंगामे के चलते पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

सवाल जो खड़े होते हैं

क्या एक स्वास्थ्यकर्मी का इस तरह हिंसा में शामिल होना सेवा नियमों का खुला उल्लंघन नहीं? वीडियो सामने आने के बावजूद अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं? क्या आदिवासी महिला को न्याय मिल पाएगा या मामला फाइलों में दब जाएगा? यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और ताकत के दुरुपयोग की तस्वीर है।

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