BJP को बड़ा झटका! पिता के बाद बेटे से भी हारे भाजपा प्रत्याशी, कांग्रेस ने कायम रखा दबदबा

Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Jun, 2026 01:20 PM

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नगर निगम के वार्ड क्रमांक-29 के उपचुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजनीतिक समीकरणों से ज्यादा असर जनता के भरोसे का होता है।

बिलासपुर। नगर निगम के वार्ड क्रमांक-29 के उपचुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजनीतिक समीकरणों से ज्यादा असर जनता के भरोसे का होता है। प्रदेश और केंद्र में सत्ता होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के इस मजबूत गढ़ को भेदने में नाकाम रही। कांग्रेस प्रत्याशी शेख आजम ने भाजपा के वी. मधुसूदन राव को 1062 मतों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की और पार्टी के चार दशक पुराने विजय अभियान को बरकरार रखा।

गुरुवार सुबह बर्जेस हिंदी मीडियम स्कूल में मतगणना शुरू हुई। महज चार राउंड की गिनती में तस्वीर साफ हो गई और कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल बन गया। मुख्य मुकाबला कांग्रेस के शेख आजम और भाजपा के मधुसूदन राव के बीच था, लेकिन परिणाम एकतरफा साबित हुआ।

इस जीत की खास बात यह रही कि मधुसूदन राव को पहले शेख आजम के पिता और पूर्व पार्षद शेख असलम ने हराया था, और अब बेटे शेख आजम ने भी उन्हें चुनावी मैदान में मात दे दी। लगातार तीसरी हार के साथ भाजपा के लिए यह परिणाम राजनीतिक आत्ममंथन का विषय बन गया है।

वार्ड-29 लंबे समय से कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है। पार्षद शेख गफ्फार के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके भाई शेख असलम विजयी हुए थे। बाद में सामान्य चुनाव में भी जनता ने उन्हें ही चुना। उनके निधन के बाद सीट रिक्त होने पर हुए इस उपचुनाव में कांग्रेस ने शेख आजम पर भरोसा जताया और जनता ने भी उस भरोसे पर मुहर लगा दी।

1 जून को हुए मतदान में कुल 5255 मतदाताओं में से 3665 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। 69.74 प्रतिशत मतदान ने यह संकेत दे दिया था कि चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह है। परिणाम आने के बाद साफ हो गया कि वार्ड की जनता ने एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में अपना विश्वास दोहराया है।

इस उपचुनाव का संदेश केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है। यह परिणाम बताता है कि स्थानीय राजनीति में वर्षों से बने जनसंपर्क, संगठन की पकड़ और जनता का विश्वास आज भी सत्ता की ताकत पर भारी पड़ सकता है। वार्ड-29 में कांग्रेस ने सिर्फ एक सीट नहीं जीती, बल्कि अपने 40 साल पुराने राजनीतिक वर्चस्व को भी मजबूती से कायम रखा है।

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