Edited By Himansh sharma, Updated: 01 Jul, 2026 02:58 PM

मध्यप्रदेश कांग्रेस में उज्जैन की चर्चित भूमि आवंटन मामले को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में उज्जैन की चर्चित भूमि आवंटन मामले को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलग-अलग रुख के बाद पार्टी के भीतर मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। इस बीच कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए दिग्विजय सिंह के खिलाफ तीखी नाराजगी जताई है और पार्टी हाईकमान से अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर दी है।
निधि चतुर्वेदी ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता को संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक मंच से बयान देकर उन्हें कठघरे में खड़ा नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति थी तो उसे पार्टी के भीतर बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता था, लेकिन मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के दावों को खारिज करना संगठनात्मक अनुशासन के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का हालिया रुख व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित प्रतीत होता है। पोस्ट में उन्होंने यह भी दावा किया कि अपने पुत्र जयवर्धन सिंह को भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी दिलाने की राजनीति के कारण संगठन को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लिखा कि इस तरह के कदम विपक्ष को राजनीतिक बढ़त देने का काम कर रहे हैं और इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
निधि चतुर्वेदी ने वर्ष 2020 में मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरने से लेकर विधानसभा, लोकसभा और हालिया राज्यसभा चुनाव तक का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार बढ़ती गुटबाजी और व्यक्तिगत हितों की राजनीति ने पार्टी को कमजोर किया है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि संगठन की साख और कार्यकर्ताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए इस मामले में जल्द निर्णय लिया जाए।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला उज्जैन में वीर भारत न्यास को सरकारी भूमि आवंटन से जुड़ा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन महज एक रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर न्यास को दे दी गई। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कहा कि जमीन आवंटन में अनियमितता के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। अब प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी की तीखी प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही खींचतान ने मध्यप्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।