CM हेल्पलाइन बनी मजाक! भ्रष्टाचार की जांच बिना ही शिकायतकर्ता को बताया संतुष्ट

Edited By Himansh sharma, Updated: 16 May, 2026 04:37 PM

corruption complaint closed without probe

मध्यप्रदेश में जनता को न्याय देने की सोच के साथ शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन योजना की सिंगरौली जिले में स्थिति ठीक नहीं है

सिंगरौली(अंबुज तिवारी) मध्यप्रदेश में जनता को न्याय देने की सोच के साथ शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन योजना की सिंगरौली जिले में स्थिति ठीक नहीं है. यहां अधिकारी कर्मचारी शिकायतों की सही जांच करने के बजाय फर्जी निराकरण डालकर शिकायतों को बंद करवाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. जनपद पंचायत देवसर से सामने आया मामला इसी बात की पुष्टि कर रहा है.

दरअसल सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के 2 माह बाद भी निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार की जांच शुरू नहीं हो पाई. देवसर के नौढ़िया ग्राम पंचायत के सुपेला निवासी प्रदीप पाठक ने नाली निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की 15 मार्च को सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत में बताया है कि सुपेला में किया गया नाली निर्माण गुणवत्ताविहीन है. शिकायत को 2 माह बीत चुके हैं लेकिन शिकायत की सही तरीके से अब तक जांच नहीं हो पाई है.

शिकायतकर्ता की माने तो आज तक मौके पर नाली की जांच करने कोई टीम पहुंची ही नहीं न ही किसी कर्मचारी पर इस भ्रष्टाचार की जिम्मेदार तय हो पाई है.हैरान करने वाली बात यह है कि बिना जांच कार्यवाही के ही जनपद के कर्मचारियों ने सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर 3 बार फर्जी निराकरण दिखाकर यह बता दिया कि शिकायत कर्ता निराकरण से संतुष्ट है.

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बताया जा रहा है नाली निर्माण को अक्टूबर 2023 में स्वीकृति मिली थी. जिसमें लगभग मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना अंतर्गत 9 लाख 87 हजार रुपए लागत से 340 मीटर लंबी नाली का निर्माण कराया जाना था.निर्माण एजेंसी ने मौके पर नाली का आधा अधूरा गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य कराकर ही लगभग 7 लाख रु से अधिक का भुगतान कर दिया.

नाली निर्माण में पहले भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की बात खबरों में आई थी. सूत्रों की माने तो इस नाली के भ्रष्टाचार में शामिल पंचायत कर्मी व उपयंत्री यह बताते फिर रहे हैं कि कागज़ों में भले ही निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत है. लेकिन नाली निर्माण में भ्रष्टाचार एक जनप्रतिनिधि के सगे संबंधी के इशारे पर किया गया है. 2 माह से सीएम हेल्पलाइन में नाली के भ्रष्टाचार की लंबित शिकायत और जांच के नाम पर फर्जी निराकरण दिखाना भी इसी बात की ओर इशारा कर रहा है. क्योंकि 3 जनप्रतिनिधियों के निवास स्थान वाले गांव में बिना किसी जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप निर्माण कार्य में इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव नहीं है.

फिलहाल देवसर जनपद पंचायत में सीएम हेल्पलाइन की शिकायत के फर्जी निराकरण का मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत के सीईओ जगदीश गोमे क्या कार्यवाही करते हैं. यह देखने वाली बात होगी.

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