Edited By Desh Raj, Updated: 05 May, 2026 08:52 PM

जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) पद को लेकर चल रही आपसी खींचतान अब खुलकर मैदान के सामने आ गई है। एक ही कुर्सी पर दो अधिकारियों के दावे ने जिला स्वास्थ्य विभाग में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
रायसेन (शिवलाल यादव): जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) पद को लेकर चल रही आपसी खींचतान अब खुलकर मैदान के सामने आ गई है। एक ही कुर्सी पर दो अधिकारियों के दावे ने जिला स्वास्थ्य विभाग में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। जिसका असर अब आम जनता तक पहुंचने लगा है। मंगलवार को यह विवाद उस समय और गरमा गया जब डॉ. एचएन मांडरे दफ्तर में फिर से नौकरी ज्वाइन करने पहुंचे, लेकिन उन्हें कार्यालय के गेट पर ताला लटका मिला। यह नजारा देखकर वे भड़क उठे और मौके पर ही कर्मचारियों पर जमकर नाराजगी जाहिर की।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से सीएमएचओ पद को लेकर डॉ. एचएन मांडरे और शल्य चिकित्सक डॉ. दिनेश खत्री के बीच खींचतान चल रही है। इसी बीच जबलपुर हाईकोर्ट से डॉ. मांडरे को राहत देते हुए स्टे ऑर्डर मिला। जिसमें उन्हें यथावत पद पर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद डॉ. खत्री पिछले कुछ दिनों से सीएमएचओ की कुर्सी संभाले हुए थे।
मंगलवार को दोपहर जब डॉ. मांडरे दफ्तर पहुंचे तो मुख्य गेट पर ताला जड़ा मिला। इसे लेकर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सरकारी कार्यालय में कार्य समय के दौरान ताला लगाना नियमों के विपरीत है और यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मौके पर ही डॉ. खत्री पर मनमानी और पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए।
डॉ. मांडरे ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी की है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें पदभार ग्रहण करने से रोका जा रहा है, जो न्यायालय की अवमानना के दायरे में आ सकता है।
इधर, इस पूरे घटनाक्रम के चलते जिला स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी असमंजस में हैं कि आखिर वे किसके निर्देशों का पालन करें। दो अधिकारियों के बीच चल रही इस आपसी रस्साकशी ने विभागीय कार्यों की गति को प्रभावित किया है। कई योजनाओं और व्यवस्थाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
जिले में पहले ही स्वास्थ्य सेवाएं संसाधनों की कमी और स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं। ऐसे में शीर्ष पद को लेकर विवाद ने हालात को और बिगाड़ दिया है। मरीजों को समय पर इलाज और सुविधाएं मिलें, इसके लिए प्रशासनिक स्थिरता बेहद जरूरी मानी जाती है।लेकिन मौजूदा हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं।
बहरहाल अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और सीएमएचओ की कुर्सी पर जारी यह विवाद कब तक खत्म होता है। फिलहाल, एक कुर्सी पर दो दावेदारों की यह लड़ाई स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।