Edited By Himansh sharma, Updated: 30 Jan, 2026 01:52 PM

राजधानी रायपुर में रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन और पर्फेक्ट रोल की बिक्री पर पुलिस कमिश्नर द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सियासत गरमा गई है।
रायपुर। राजधानी रायपुर में रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन और पर्फेक्ट रोल की बिक्री पर पुलिस कमिश्नर द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे अजब-गजब फैसला” करार दिया है।
भूपेश बघेल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि इस आदेश से सरकार खुद यह स्वीकार कर रही है कि रायपुर में गांजा और चरस जैसे नशीले पदार्थों का सेवन बड़े पैमाने पर हो रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नशे की जड़ पर प्रहार करने के बजाय सरकार केवल उससे जुड़ी सामग्री पर प्रतिबंध लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आदेश की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांजा-चरस के सेवन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की बिक्री रोकने से नशाखोरी पर अंकुश नहीं लगेगा। उन्होंने इसकी तुलना करते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसे शराब की खपत कम करने के लिए डिस्पोजेबल या कांच के गिलास की बिक्री पर ही प्रतिबंध लगा दिया जाए।
भूपेश बघेल ने आदेश की समय-सीमा को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि यह प्रतिबंध सिर्फ 29 मार्च 2026 तक, यानी महज दो महीने के लिए ही क्यों लागू किया गया है। अगर सरकार वाकई नशे के खिलाफ गंभीर है, तो इसे स्थायी आदेश क्यों नहीं बनाया गया?
उन्होंने आदेश में लिखे गए “यदि बीच में वापस न लिया गया” वाक्य पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसा कौन है जो इस आदेश को बीच में वापस ले सकता है। यह पंक्ति खुद सरकार की नीयत पर संदेह पैदा करती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ इसकी चपेट में है। ऐसे में यदि सरकार सच में गंभीर है, तो उसे मजबूत और ठोस फैसले लेने चाहिए, न कि केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले आदेश जारी करने चाहिए।