27% OBC आरक्षण पर पूर्व CM कमलनाथ ने सरकार को घेरा, कहा- इन कमियों की वजह से लटका आरक्षण

Edited By meena, Updated: 21 Feb, 2026 04:29 PM

former cm kamal nath criticized the government on the 27 obc reservation

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर पूर्व सीएम कमलनाथ का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है...

भोपाल: मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर पूर्व सीएम कमलनाथ का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, वह केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। मुझे हैरानी है कि हमारी कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने की प्रक्रिया पूरी कर दी थी, और 27% आरक्षण प्रदेश में लागू भी हो गया था, लेकिन कुछ लोगों ने छल करते हुए इसे रोकने का काम किया, नतीजतन आज तक हमारे ओबीसी समाज को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। आखिर यह कैसी व्यवस्था है, जिसमें एक सरकार अधिकार देती है, तो दूसरे दल की सरकार इसे लागू नहीं करने को अपनी उपलब्धि मानती है। हाईकोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। प्रदेश के युवाओं को उम्मीद थी कि अब शीर्ष अदालत में ठोस तैयारी के साथ सरकार अपना पक्ष रखेगी और वर्षों से लटका विवाद सुलझेगा। लेकिन जो खबरें सामने आईं, वे चौंकाने वाली हैं। कभी सरकार के वकील अधूरी तैयारी के साथ पहुंचे, तो कभी समय पर उपस्थित ही नहीं हुए। क्या यह संवेदनशील मुद्दा इतनी लापरवाही से निपटाने लायक था? क्या सरकार को अंदाज़ा नहीं कि इस फैसले पर लाखों भर्तियां, हजारों परिवारों की उम्मीदें और पूरे समाज का विश्वास टिका हुआ है? अब सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाईकोर्ट को भेज दिया है और विशेष पीठ बनाकर तीन महीने में निर्णय लेने को कहा है। सवाल यह है कि यदि शुरुआत से ही गंभीरता दिखाई जाती, तो क्या यह स्थिति बनती? क्या युवाओं को वर्षों तक असमंजस में रखा जाना चाहिए था? 2019 से शुरू हुआ यह विवाद आज 2026 तक खिंच चुका है। कितनी पीढ़ियां इस इंतज़ार में अपनी आयु सीमा पार कर चुकीं, कितनी भर्तियां अटक गईं, इसका हिसाब कौन देगा? सरकार बार-बार दावा करती है कि वह पिछड़े वर्ग के साथ खड़ी है। लेकिन यदि 27% आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से लागू ही नहीं हो पा रहा, तो यह समर्थन केवल भाषणों तक सीमित क्यों दिखाई देता है? यदि नीति सही थी, तो उसकी कानूनी तैयारी पुख्ता क्यों नहीं थी? यदि सामाजिक न्याय का संकल्प था, तो अदालत में पक्ष मजबूती से क्यों नहीं रखा गया? क्या हमारे देश में न्याय मिलना इतना कठिन हो गया है? या फिर न्याय की राह में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है? प्रदेश का ओबीसी वर्ग जवाब चाहता है। युवा जानना चाहते हैं कि उनका अधिकार कब तक अदालतों की तारीखों में उलझा रहेगा। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह केवल घोषणा करती है या वास्तव में उसे लागू कराने की क्षमता और गंभीरता भी रखती है। अब समय आ गया है कि सरकार राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई दिखाए। सामाजिक न्याय केवल घोषणा से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, कानूनी तैयारी और जवाबदेही से स्थापित होता है। मध्यप्रदेश का ओबीसी समाज अब प्रतीक्षा नहीं, परिणाम चाहता है।

बता दें कि मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। वर्ष 2019 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है और कहा है कि अंतिम फैसला हाईकोर्ट ही करेगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला लंबे समय से “पिंग-पोंग बॉल’ की तरह इधर-उधर घूम रहा है, जो उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि अब इस पर ठोस निर्णय होना चाहिए। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 87-13 फॉर्मूला लागू करते हुए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया था और शेष 13 प्रतिशत को होल्ड पर रखा गया था। इससे पहले हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगा दी थी, क्योंकि यह कुल आरक्षण सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो रहा था।

अनारक्षित वर्ग की ओर से दलील दी गई थी कि 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। वहीं, ओबीसी वर्ग लंबे समय से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की विस्तृत सुनवाई हाईकोर्ट में होनी चाहिए और वहीं अंतिम निर्णय लिया जाए। अब सभी पक्षों की निगाहें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पर टिक गई हैं, जहां इस संवेदनशील मुद्दे पर निर्णायक सुनवाई होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि आने वाला निर्णय हजारों अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रियाओं पर सीधा असर डाल सकता है।

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