देवपुर जंगल में दिखी जायंट मालाबार स्क्विरल, बारनवापारा क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत

Edited By Vandana Khosla, Updated: 28 May, 2026 01:53 PM

giant malabar squirrels spotted in devpur forest

बलौदाबाजार (अशोक टंडन): बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत 16 मई से 22 मई 2026 तक आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान प्रकृति एवं जैव विविधता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अवलोकन सामने आया। कैंप के शुभारंभ दिवस 16 मई को देवपुर जंगल में आयोजित बर्डिंग ट्रेल...

बलौदाबाजार (अशोक टंडन): बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत 16 मई से 22 मई 2026 तक आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान प्रकृति एवं जैव विविधता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अवलोकन सामने आया। कैंप के शुभारंभ दिवस 16 मई को देवपुर जंगल में आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान प्रतिभागियों ने दुर्लभ “जायंट मालाबार स्क्विरल” (Indian Giant Squirrel) को देखा, जिससे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।

इस दुर्लभ वृक्षवासी गिलहरी की पहचान बलौदाबाजार के प्रकृति एवं पक्षी प्रेमी तथा साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की। उनके अनुसार यह प्रजाति सामान्य गिलहरियों की तुलना में आकार में काफी बड़ी होती है और इसका आकर्षक रंग संयोजन इसे अलग पहचान देता है। देवपुर जंगल में इसका दिखाई देना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता एवं स्वस्थ वन पारिस्थितिकी का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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जायंट मालाबार स्क्विरल, जिसे वैज्ञानिक रूप से Ratufa indica कहा जाता है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग तीन फीट तक हो सकती है। इसके शरीर पर गहरा लाल, काला, भूरा एवं क्रीम रंगों का मिश्रण इसे बेहद आकर्षक बनाता है।

यह गिलहरी पूरी तरह वृक्षवासी स्वभाव की होती है और अपना अधिकांश जीवन ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर बिताती है। यह बहुत कम जमीन पर उतरती है तथा एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लगभग 20 फीट लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वन क्षेत्र में इस प्रजाति की उपस्थिति वहां के स्वस्थ वृक्ष आवरण और समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN Red List) ने इस प्रजाति को “Least Concern” श्रेणी में रखा है, हालांकि जंगलों की कटाई और आवास विखंडन के कारण इसके प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं। भारत में यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-II के अंतर्गत संरक्षित है, जिसके तहत इसका शिकार या व्यापार प्रतिबंधित एवं दंडनीय अपराध है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वन्यजीव अवलोकन न केवल क्षेत्र की जैव विविधता को समझने में मददगार होते हैं, बल्कि युवाओं, बच्चों और प्रकृति प्रेमियों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं। देवपुर समर कैंप के दौरान इस दुर्लभ प्रजाति का दिखाई देना प्रतिभागियों के लिए विशेष अनुभव साबित हुआ।

इस संबंध में वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य एवं आसपास के वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वन्यजीव अवलोकन हमें जंगलों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की प्रेरणा देते हैं।

 

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