कौन हैं IPS अरुण देव गौतम? जिन्हें मिली राज्य में पुलिस की कमान, बने नए DGP

Edited By Himansh sharma, Updated: 16 May, 2026 03:15 PM

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छत्तीसगढ़ पुलिस को आखिरकार 17 महीने बाद स्थायी मुखिया मिल गया।

रायपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस को आखिरकार 17 महीने बाद स्थायी मुखिया मिल गया। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को फुल-टाइम डीजीपी नियुक्त कर पुलिस महकमे की कमान सौंप दी है। गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह द्वारा जारी आदेश के साथ ही लंबे समय से चली आ रही इंतजार की स्थिति खत्म हो गई। प्रभारी डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे अरुण देव गौतम अब स्थायी तौर पर प्रदेश की कानून व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।

उत्तरप्रदेश के कानपुर के छोटे से गांव अभयपुर से निकलकर छत्तीसगढ़ पुलिस के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले अरुण देव गौतम का सफर संघर्ष, अनुशासन और सख्त प्रशासनिक छवि की मिसाल माना जाता है। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले गौतम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए और फिर जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी बने और मध्यप्रदेश कैडर से अपने करियर की शुरुआत की।

जबलपुर में प्रशिक्षु आईपीएस और बिलासपुर में सीएसपी के तौर पर शुरुआत करने वाले अरुण देव गौतम ने अपने लंबे करियर में कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। भोपाल से लेकर कवर्धा तक और फिर छत्तीसगढ़ बनने के बाद कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी रहते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी कार्यशैली हमेशा चर्चा में रही। 2009 के राजनांदगांव नक्सली हमले के बाद जब पूरा पुलिस महकमा दबाव में था, तब सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें वहां भेजा। वहीं झीरम घाटी कांड के बाद बस्तर आईजी की जिम्मेदारी देकर चुनावी दौर में सुरक्षा व्यवस्था संभालने का बड़ा दायित्व सौंपा गया। कठिन हालात में शांत और रणनीतिक पुलिसिंग उनकी पहचान बनी।

अरुण देव गौतम को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए भारतीय पुलिस पदक, राष्ट्रपति पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। कोसोवा में संयुक्त राष्ट्र मिशन के दौरान उनकी सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया था। अब स्थायी डीजीपी बनने के बाद उनसे प्रदेश में कानून व्यवस्था, नक्सल मोर्चे और पुलिसिंग में नई कार्यशैली की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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