Edited By Himansh sharma, Updated: 06 Feb, 2026 03:20 PM

मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सियासी संकेत सामने आ रहा है।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सियासी संकेत सामने आ रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सरकार से दूरी की चर्चाएं अब खुले तौर पर सियासी गलियारों में गूंजने लगी हैं। बीते दिन पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान मंत्री का बदला हुआ रवैया कई सवाल खड़े कर गया। प्रदेश संगठन ने मंत्रियों के लिए जनसुनवाई का समय दोपहर 1 से 3 बजे निर्धारित किया था, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय तय समय से करीब एक घंटे पहले ही जनसुनवाई खत्म कर रवाना हो गए। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि मंत्री सिर्फ औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे थे। उनके चेहरे पर नाराजगी और असहजता साफ झलक रही थी।
केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची नाराजगी!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी नाराजगी से केंद्रीय नेतृत्व को भी अवगत करा दिया है।। इस पूरे घटनाक्रम के बाद संगठन के भीतर लगातार मंथन का दौर जारी है, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता फिलहाल इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।
कैबिनेट बैठकों से भी बनाई दूरी
कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वे वरिष्ठ मंत्री होने के बावजूद लगातार दो कैबिनेट बैठकों में शामिल नहीं हुए। पार्टी और विपक्ष दोनों ही इसे सरकार से उनके असंतोष के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि संगठन की जिम्मेदारियों के चलते वे पूरी तरह किनारा भी नहीं कर पा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन के सामने खुली नाराजगी दिखाना उनके सियासी भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
कांग्रेस का हमला तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष लगातार कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग को लेकर हमलावर है और इसे सरकार के भीतर गहरी कलह का संकेत बता रहा है।
बड़ा सवाल
अब सवाल यह है कि क्या कैलाश विजयवर्गीय और सरकार के बीच बढ़ती दूरी कोई बड़ा सियासी मोड़ लेने वाली है, या संगठन के मंथन के बाद मामला शांत हो जाएगा?
फिलहाल, मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज है..