Edited By Vandana Khosla, Updated: 28 Apr, 2026 03:26 PM

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। भाजपा में लगातार हो रही नियुक्तियां को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और मजबूत हो गई है कि जल्द ही कैबिनेट विस्तार को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से हरी...
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। भाजपा में लगातार हो रही नियुक्तियां को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और मजबूत हो गई है कि जल्द ही कैबिनेट विस्तार को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिल सकती है। माना जा रहा है कि 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस बार सिर्फ खाली पदों की भरपाई नहीं करेगी, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।
फिलहाल 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल में चार पद रिक्त हैं, लेकिन संभावना है कि इस विस्तार में 4 से 5 नए चेहरों को मौका दिया जाए। साथ ही “गुजरात मॉडल” की तर्ज पर कुछ अनुभवी विधायकों की वापसी और कुछ मौजूदा चेहरों के संगठन में समायोजन की भी चर्चा है।
राजनीतिक हलकों में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें गोपाल भार्गव, मालिनी गौड़, बृजेंद्र सिंह यादव, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस और शैलेंद्र कुमार जैन शामिल हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस बार सूची यहीं तक सीमित नहीं रहेगी।
सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि 2 से 3 ऐसे नाम भी सामने आ सकते हैं, जो राजनीतिक हलकों को चौंका सकते हैं। ये वे चेहरे हो सकते हैं जिन्हें अभी तक गंभीर दावेदारों की सूची में भी नहीं गिना जा रहा था, लेकिन संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों के चलते उनकी एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
इसके अलावा यह भी संकेत मिल रहे हैं कि निगम-मंडलों और संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार को भी एक साथ संतुलित किया जाएगा, ताकि सभी वर्गों और क्षेत्रों को साधा जा सके। दिल्ली से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही तस्वीर साफ होगी, लेकिन फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा फेरबदल अब ज्यादा दूर नहीं है।