राजस्थान-छत्तीसगढ़ की राह पर MP, सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव

Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jan, 2026 02:36 PM

mp on the path of rajasthan chhattisgarh

मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही सरकारी नौकरी से जुड़ा एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेने जा रही है।

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही सरकारी नौकरी से जुड़ा एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेने जा रही है। मोहन यादव सरकार अब सरकारी सेवाओं में लागू दो बच्चों की अनिवार्य शर्त को समाप्त करने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से राय लेने के बाद इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे शीघ्र ही कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

इस फैसले से उन हजारों कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जो केवल इस शर्त के कारण सरकारी नौकरी से वंचित रह गए थे या जिनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

2001 से लागू था सख्त नियम

प्रदेश में यह नियम 26 जनवरी 2001 से लागू था। इसके तहत यदि किसी कर्मचारी को तीसरा बच्चा होता था तो वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता था, वहीं नौकरी के दौरान तीसरा बच्चा होने पर सेवा समाप्त करने तक का प्रावधान था। उस समय यह फैसला प्रदेश में बढ़ती जनसंख्या और ऊंची प्रजनन दर को देखते हुए लिया गया था।

हालांकि अब हालात बदल चुके हैं। एसआरएस बुलेटिन 2023 के मुताबिक मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.4 है। शहरी क्षेत्रों में यह 1.8 और ग्रामीण इलाकों में 2.6 दर्ज की गई है। देश की औसत टीएफआर 1.9 है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार नियमों में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राजस्थान–छत्तीसगढ़ पहले ही कर चुके हैं बदलाव

मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य इस तरह की शर्तों में संशोधन कर चुके हैं। अब एमपी सरकार भी इन्हीं राज्यों की तर्ज पर सामाजिक और प्रशासनिक सुधार की ओर कदम बढ़ा रही है।

इन विभागों के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

नए नियम का सीधा लाभ

स्कूल शिक्षा

उच्च शिक्षा

चिकित्सा शिक्षा

और अन्य शासकीय विभागों
के कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को मिलेगा। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि यह नियम पिछली तारीख से लागू नहीं होगा, इसलिए जिन मामलों में पहले ही अंतिम कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस बदलाव का लाभ नहीं मिलेगा।

परिवीक्षा अवधि में भी बड़ा सुधार

सरकार केवल दो बच्चों की शर्त ही नहीं, बल्कि परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर भी बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब दो या तीन साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारियों को छह महीने के भीतर नियमित करना अनिवार्य होगा।

अब तक देरी के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, क्योंकि उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि प्रभावित होती थी। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहा था।

सरकार का संदेश साफ

मोहन यादव सरकार का यह कदम न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि बदलते सामाजिक और जनसांख्यिकीय हालात को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक और मानवीय फैसला माना जा रहा है।

कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही यह निर्णय प्रदेश के हजारों कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!