अब नहीं लटकेंगे केस! 14 दिन में फैसला जरूरी, नहीं तो पुलिस अफसर पर गिरेगी गाज

Edited By Himansh sharma, Updated: 16 Apr, 2026 12:48 PM

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मध्य प्रदेश में अब पुलिस जांच के नाम पर मामलों को लंबे समय तक लटकाकर नहीं रख सकेगी।

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब पुलिस जांच के नाम पर मामलों को लंबे समय तक लटकाकर नहीं रख सकेगी। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों के एसपी और पुलिस कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी शिकायत पर प्रारंभिक जांच अधिकतम 14 दिनों में पूरी करना अनिवार्य होगा।

नए सर्कुलर के मुताबिक, इस अवधि के भीतर यह तय करना होगा कि मामले में एफआईआर दर्ज की जाए या नहीं। यदि तय समयसीमा का पालन नहीं होता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, PHQ को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई मामलों को जांच के नाम पर जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। इस दौरान पुलिस पर अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

सर्कुलर में यह भी साफ किया गया है कि थाना प्रभारी केवल उन्हीं मामलों में प्रारंभिक जांच शुरू कर सकेंगे, जिनमें सजा तीन से सात साल के बीच निर्धारित है। साथ ही, इसके लिए डीएसपी रैंक के अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

PHQ ने इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। प्रारंभिक जांच केवल सीमित परिस्थितियों में ही की जा सकती है और उसे भी तय समयसीमा में पूरा करना जरूरी है।

हाल ही में एक मामले में एफआईआर दर्ज न कर केवल जांच तक सीमित रखने पर कोर्ट की सख्त नाराजगी सामने आई थी। इसके बाद ही पुलिस मुख्यालय ने पूरे प्रदेश में यह सख्ती लागू की है।

अब साफ संदेश है—

जांच के नाम पर देरी नहीं चलेगी, 14 दिन में फैसला करना ही होगा, वरना जिम्मेदारी तय होगी।

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