Edited By Vandana Khosla, Updated: 15 Sep, 2026 05:14 PM

भिण्डः मध्यप्रदेश के भिण्ड में सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और किसानों की फसलों में घूम रहे गोवंश को लेकर जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह चौहान के नोटिस के बाद पंचायतों में हलचल मच गई है। आठ सरपंचों को पद से पृथक करने की कार्रवाई की चेतावनी मिलने के बाद पंचायत...
भिण्डः मध्यप्रदेश के भिण्ड में सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और किसानों की फसलों में घूम रहे गोवंश को लेकर जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह चौहान के नोटिस के बाद पंचायतों में हलचल मच गई है। आठ सरपंचों को पद से पृथक करने की कार्रवाई की चेतावनी मिलने के बाद पंचायत स्तर पर आवारा गोवंश को रोकने की कवायद शुरू हो गई है। ग्राम पंचायत लपवाहा में सरपंच अरविंद शर्मा और सचिव रामकेश शर्मा ने गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों से अपनी-अपनी गायों को घर पर बांधकर रखने की अपील की है। वहीं नोटिस का जवाब देने के लिए सभी सरपंचों को मंगलवार 15 सितंबर को जिला पंचायत सीईओ के समक्ष उपस्थित होना है।
जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह चौहान ने 11 सितंबर को भ्रमण के दौरान सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और किसानों की फसलों में गोवंश विचरण करते पाया था। इसके बाद जनपद पंचायत भिण्ड की मानपुरा, बाराकलां, ऊमरी, ढोंचरा और खेरा श्यामपुरा, लहार की लपवाहा और ररी तथा रौन की मेहदा पंचायत के सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। नोटिस में कहा गया है कि सड़क पर घूमते गोवंश से आवागमन प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं और जन-धन की हानि की आशंका बनी रहती है। पंचायतों को गोवंश को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में पंचायत स्तर पर गोवंश को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं करने को पदीय कर्तव्य के विपरीत माना गया है। इसी आधार पर पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंचों को पद से पृथक करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरपंचों को आज अपने जवाब के साथ कार्रवाई से जुड़े साक्ष्य भी प्रस्तुत करने होंगे। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई की चेतावनी के बाद पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीणों से संपकर् कर गोवंश को सड़कों से हटाने की अपील कर रहे हैं। लपवाहा में मुनादी कराकर ग्रामीणों से कहा गया कि वे अपनी गायों को खुला न छोड़ें और उन्हें घर पर बांधकर रखें। पंचायत स्तर पर इस कवायद का उद्देश्य सड़कों के साथ किसानों की फसलों में पहुंच रहे गोवंश को रोकना है।
अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सरपंचों की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई तय होगी। पंचायतों में गोवंश को रखने के लिए शासन की ओर से गोशालाएं बनाई गई हैं। इनके निर्माण और संचालन पर सरकारी राशि खर्च की जाती है। भूसा-दाना, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था भी की जाती है। इसके बावजूद गोवंश के सड़कों और किसानों की फसलों में घूमने की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में पंचायतों के सामने अब गोशालाओं में गोवंश रखने और उनकी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से निभाने की चुनौती है।