Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Jun, 2026 12:50 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का ऐसा दौर शुरू हुआ है, जिसने कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी तलवारें खिंचवा दी हैं।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का ऐसा दौर शुरू हुआ है, जिसने कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी तलवारें खिंचवा दी हैं। वजह बनी हैं पूर्व मंत्री और सिंधिया समर्थक नेता इमरती देवी, जिन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का खुला निमंत्रण देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
दरअसल, हाल ही में कांग्रेस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह को दूसरी कुर्सी पर बैठने का इशारा करते नजर आए। भाजपा ने इसे कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं के कथित अपमान से जोड़ते हुए मुद्दा बना लिया, जबकि कांग्रेस ने इसे सामान्य व्यवस्था का हिस्सा बताया।
इसी विवाद के बीच इमरती देवी ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर हुई है। उनके मुताबिक कांग्रेस में अब वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं बचा और पार्टी पूरी तरह बिखराव की ओर बढ़ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जिस दल में दिग्विजय सिंह जैसे नेता को सम्मान न मिले, वहां भविष्य की कल्पना करना मुश्किल है।
इमरती देवी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने दिग्विजय सिंह को भाजपा में आने की सलाह देते हुए कहा कि भाजपा एक विशाल समुद्र की तरह है, जहां हर नेता को सम्मान मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो पार्टी उनका खुले दिल से स्वागत करेगी।
हालांकि यह बयान कांग्रेस नेताओं को नागवार गुजरा। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा और इमरती देवी दोनों को निशाने पर लिया। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि इमरती देवी को पहले अपनी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीतिक स्थिति का आकलन करना चाहिए, उसके बाद किसी दूसरे दल के नेताओं को सलाह देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस विचारधारा के नेता हैं और पार्टी छोड़ने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
वहीं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी तीखा जवाब देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह उन नेताओं में हैं जो विचारधारा के लिए राजनीति करते हैं, पद और सत्ता के लिए नहीं। उन्होंने इमरती देवी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि उन्होंने राजनीतिक सौदेबाजी का रास्ता नहीं चुना होता तो आज उनकी स्थिति कुछ और होती।
एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ यह विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच नए राजनीतिक संग्राम का रूप ले चुका है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या फिर इसके पीछे प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलावों की आहट छिपी हुई है। फिलहाल दोनों दलों के नेताओं के बीच जारी जुबानी जंग ने सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है।