भूखे-नंगे बयान पर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा : यह कांग्रेस की संस्कृति है

Edited By PTI News Agency, Updated: 13 Oct, 2020 10:00 PM

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भोपाल, 13 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस के एक किसान नेता के कथित ‘‘भूखे-नंगे घर का’’ बयान पर एक बार फिर निशाना साधते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कांग्रेस की संस्कृति है जो ग़रीबों के प्रति उसके रवैये को उजागर करती...

भोपाल, 13 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस के एक किसान नेता के कथित ‘‘भूखे-नंगे घर का’’ बयान पर एक बार फिर निशाना साधते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कांग्रेस की संस्कृति है जो ग़रीबों के प्रति उसके रवैये को उजागर करती है।


मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के प्रचार अभियान के तहत पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश किसान कांग्रेस के नेता दिनेश गुर्जर ने रविवार को कहा था, ‘‘ कमलनाथ देश के दूसरे नंबर के उद्योगपति हैं। शिवराज की तरह नंगे भूखे घर के नहीं हैं। ये (शिवराज) खुद को किसान नेता कहते हैं...।’’
प्रदेश भाजपा कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए चौहान ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ने एक बार ‘‘चायवाला’’ या चाय बेचने वाले (नरेन्द्र मोदी का मजाक उड़ाने के लिये एक कांग्रेस नेता द्वारा इस्तेमाल किये गये शब्द) की साख पर सवाल उठाया था लेकिन पूरे देश में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और अब वे चौहान को ‘‘भूखे-नंगे घर का’’ कह रहे हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘देखिये, मैं आहत नहीं हुआ लेकिन इसने सब गरीबों को आहत किया और जब गरीब आहत होता है तो मैं अपने आप आहत हो जाता हूं।’’
चौहान ने कांग्रेस नेता गुर्जर की उन पर की गयी ‘‘भूखे-नंगे घर का’’ टिप्पणी पर कहा, ‘‘ ये उनके अंदर जो संस्कार हैं, भाव हैं, उसका प्रकटीकरण है।’’
कांग्रेस नेता के इस बयान को लेकर मध्यप्रदेश में भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को फेसबुक पर अपनी डीपी में शिवराज सिंह चौहान के फोटे के साथ हैशटेग ‘‘मैं भी शिवराज’’ के साथ ‘‘अगर गरीब होना गुनाह है तो....’’ लिख कर एक अभियान चलाया है।


कांग्रेस नेता कमलनाथ के आरोप कि शिवराज हमेशा जेब में नारियल लेकर चलते हैं और जहां मौका मिलता है किसी भी योजना की घोषणा करते हुए फोड़ देते हैं, पर शिवराज ने कहा, ‘‘ नारियल नहीं उनको विकास पर आपत्ति है। हमने कोरोना काल में भी विकास के कामों को रुकने नहीं दिया। धन की कमी का रोना नहीं रोया। जहां जरुरत होती है, जनता मांग करती है, हम मांग स्वीकार कर लेते हैं। अब हम विकास का काम करते हैं तो वो कहते हैं कि नारियल लेकर चलते हैं।’’

यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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