Edited By meena, Updated: 25 Feb, 2026 02:06 PM

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की कुल 05 सीटों में से 02 सीटें आगामी 09 अप्रैल 2026 को रिक्त होने जा रही हैं। राज्यसभा सदस्य कवि तेजपाल सिंह तुलसी एवं फूलो देवी नेताम का कार्यकाल पूर्ण होने ...
रायपुर : छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की कुल 05 सीटों में से 02 सीटें आगामी 09 अप्रैल 2026 को रिक्त होने जा रही हैं। राज्यसभा सदस्य कवि तेजपाल सिंह तुलसी एवं फूलो देवी नेताम का कार्यकाल पूर्ण होने के कारण इन पदों पर निर्वाचन कराया जाएगा। इन दोनों सदस्यों के कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही संसदीय प्रतिनिधित्व की निरंतरता बनाए रखने हेतु द्विवार्षिक चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। यह निर्वाचन राज्य की राजनीतिक दिशा और दलगत संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा
रिक्त होने वाली सीटों के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 18 फरवरी को प्रेस नोट जारी कर राज्यसभा द्विवार्षिक निर्वाचन कार्यक्रम घोषित किया गया है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार अधिसूचना 26 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 05 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नामांकन पत्रों की संवीक्षा 06 मार्च को संपन्न होगी। अभ्यर्थी 09 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 16 मार्च सोमवार को प्रातः 09 बजे से सायं 04 बजे तक होगा तथा उसी दिन शाम 05 बजे से मतगणना प्रारंभ की जाएगी।
नामांकन की प्रक्रिया और स्थान
नामांकन पत्र 26 फरवरी से 05 मार्च 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से दोपहर 03 बजे तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे। अभ्यर्थियों को अपने नामांकन पत्र छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन स्थित निर्धारित कक्ष में रिटर्निंग ऑफिसर, सचिव छत्तीसगढ़ विधानसभा, के समक्ष जमा करने होंगे। निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेजों सहित नामांकन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं विधिसम्मत ढंग से संपन्न कराने हेतु सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं।
विधानसभा की वर्तमान स्थिति और मतदान
राज्यसभा चुनाव में राज्य के कुल 90 विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वर्तमान विधानसभा संरचना के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के 54, इंडियन नेशनल कांग्रेस के 35 तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के 01 विधायक मतदान में भाग लेंगे। मतदान गोपनीय मतपत्र के माध्यम से संपन्न कराया जाएगा। विधानसभा की दलगत स्थिति को देखते हुए चुनाव परिणाम राजनीतिक समीकरणों के आधार पर विशेष महत्व रखता है, और सभी दल अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।