MP का वो शहर, जहां मुर्दे भी मजदूरी करते हैं...

Edited By meena, Updated: 01 Dec, 2021 01:48 PM

the city of mp where the dead also work

मध्यप्रदेश के जबलपुर में मानो भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है यहां पर तो मुर्दे भी मजदूरी कर रहे हैं और उनकी मजदूरी सरपंच सचिव से लेकर अधिकारी तक खा रहे हैं। पंजाब केसरी ने ऐसे ही मामले का खुलासा किया तो अधिकारी चुप्पी साथ बैठे हैं। मामला पनागर जनपद...

जबलपुर(विवेक तिवारी): मध्यप्रदेश के जबलपुर में मानो भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है यहां पर तो मुर्दे भी मजदूरी कर रहे हैं और उनकी मजदूरी सरपंच सचिव से लेकर अधिकारी तक खा रहे हैं। पंजाब केसरी ने ऐसे ही मामले का खुलासा किया तो अधिकारी चुप्पी साथ बैठे हैं। मामला पनागर जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बड़खेरा का है। यहां के ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए कार्यों में सरपंच और उसके पति द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किये जाने का आरोप लगाया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पनागर को दी गई लिखित शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि पंचायत में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों में मृत लोगों के नाम से हाजिरी भर दी गई, इतना ही नहीं उनके परिजनों की जानकारी के बिना बैंक से मृतकों के खाते से राशि भी निकाल ली गई।

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इस मामले का खुलासा तब हुआ जब मृतिका के पति ने जनपद कार्यालय से मनरेगा संबंधित जानकारी जुटाई तो वह भी दंग रह गया, उसकी पत्नी अनीता बाई जिनकी सन 2014 में मृत्यु हो चुकी थी, उसके नाम से 20-21 तक मस्टर रोल में हाजिरी भरकर लगातार राशि निकाली जा रही थी, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। जनपद से प्राप्त जानकारी में जब ग्रामीणजनों ने अन्य नाम देखे तो पंचायत में 15 ऐसे नाम दर्ज पाए गए जिनमें 7 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं सरपंच पति नरेंद्र कुमार व उसके पुत्र दुर्गेश कुमार के साथ 6 अन्य और ऐसे लोग हैं जो किसी अन्य प्राइवेट जगहों पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही पंचायत में किये गए कार्यों पर भी ग्रामीणों ने सरपंच सचिव द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किये जाने का आरोप लगाया।

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77 लाख रुपये के गबन के आरोप में पूर्व सरपंच, सचिव हुए थे निष्कासित
पूर्व में हुए चुनाव में बड़खेरा की उषा बाई कडेरे सरपंच पद के लिए निर्वाचित हुईं थी, उस समय अखिलेश पटेल पंचायत सचिव रहे जिनके कार्यकाल में पंचायत में काफी भ्रष्टाचार किया गया था, जिसके चलते ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन द्वारा कराई गई। जांच में यह पाया गया था कि पंचायत में मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों के नाम से कराए गए अधिकतर कार्यों में राशि तो आहरित कर ली गई जबकि मौके पर कार्य नहीं कराया जाना पाया गया था, जिसमें जांचकर्ताओं ने पंचायत में लगभग 77 लाख रु का गबन पाया था, जिसके चलते सरपंच के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सरपंच को हटा दिया गया था तो वहीं पंचायत सचिव को जिला अधिकारियों द्वारा निलंबित कर दिया गया था।

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6 माह में होने थे चुनाव, नहीं खुलता पंचायत भवन का ताला, पंचायत भवन में खुलती है राशन दुकान
पूरे मामले में पनागर जनपद के आलाधिकारियों की भूमिका को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है, 4 साल पहले सरपंच के हटाये जाने के बाद नियमानुसार आगामी 6 माह में चुनाव प्रक्रिया कराई जानी थी। तब तक पंचायत के उपसरपंच को पंचायत का प्रभार सौंपा जाना था। लेकिन तत्कालीन सचिव की पनागर जनपद अधिकारियों से सांठगांठ ओर लंबी सेटिंग के चलते निलंबित सचिव ने कोर्ट से स्टे लेकर उसी पंचायत में पुनः वापस सचिव पद पर पदस्थ हो गया और पंचायत की कमान उपसरपंच के स्थान पर पंच को सरपंच की कमान दिलवा दी गई, साथ ही उक्त प्रभारी सरपंच को वित्तीय प्रभार भी दिला दिए गए, जिसके बाद पंचायत में फिर से भ्रष्टाचार का खेल शुरू हुआ।

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उस समय से लेकर आज 4 वर्षों तक न ही पंचायत का ताला खुला है, न ही कभी ग्राम सभा का आयोजन किया गया, ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि कई वर्षों से पंचायत भवन को राशन दुकान में तब्दील कर दिया गया है। लगभग 4 सालों से पंचायत भवन में राशन दुकान संचालित हो रही है, वह भी दुकान संचालक राशन वितरित करने के लिए प्रत्येक माह में सिर्फ 3 से 4 दिनों तक पंचायत भवन का ताला खुलता है। बाकी के अन्य दिनों पंचायत भवन में ताला जड़ा रहता है। इस बीच पंचायत के लोगों को कोई समस्या का निदान कराना होता है तो उन्हें सरपंच के घर के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सचिव भी कभी कभी ही पंचायत आते हैं नहीं तो उनसे मिलने लोगों को पनागर उनके बताए स्थान पर जाना पड़ता है।

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शिकायत के 1 माह बाद अब जनपद अधिकारी ने कहा मुझे शिकायत की नहीं है जानकारी
पंचायत में मचे भ्रष्टाचार की जांच कराने शिकायतकर्ता ने 2 नवंबर को जनपद कार्यालय पनागर में उपस्थित होकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सहित जिला पंचायत सीईओ के समक्ष शिकायत देकर मामले से अवगत कराया था, लेकिन पनागर जनपद में पदस्थ अधिकारियों ने इतने बड़े मामले को भी डस्टबिन में डाल दिया, शिकायत के 1 माह बाद जब स्थानीय संवाददाता मुख्य कार्यपालन अधिकारी पनागर से मामले की जांच संबंधित जानकारी लेनी चाही तो जनपद सीईओ ने कहा कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं है, न ही उन्होंने अभी तक शिकायत पत्र देखा है।  कुल मिलाकर इतने बड़े भ्रष्टाचार के बाद भी पनागर जनपद में बैठे जवाबदार अधिकारी अभी भी कुम्भकर्णी नींद सो रहे हैं। उन्हें पंचायत में मचे भ्रष्टाचार से कोई लेना देना नहीं है। 1 माह बाद भी जांच हेतु कोई टीम गठित नहीं की गई। ऐसा हाल पनागर की कई पंचायतों में व्याप्त है, जिनमें तो कई ऐसी भी पंचायतें शामिल है जहां के सरपंच सचिवों ने शासन से जनगणना के आधार पर मिलने वाली 14 वें ओर 15 वें वित्त सहित अन्य मदों की राशि दुगनी लेने पंचायत की जनसंख्या तक बढ़ा डाली, जिससे उन्हें शासन मिलने वाली वित्तीय राशि दुगनी प्राप्त हो सके, और मनमाने बिल लगाकर राशि वसूल सके।

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