Edited By Desh sharma, Updated: 10 Jan, 2026 06:46 PM

दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड में बिजली बिल बकाया के आंकड़ा सामने आने के बाद न सिर्फ आम जनता, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक धमधा ब्लॉक में शासकीय विभागों और कुछ संस्थानों पर कुल 55 करोड़ 92 लाख 8966...
धमधा(हेमंत पाल): दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड में बिजली बिल बकाया के आंकड़ा सामने आने के बाद न सिर्फ आम जनता, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक धमधा ब्लॉक में शासकीय विभागों और कुछ संस्थानों पर कुल 5 करोड़ 92 लाख 8966 रुपये 68 पैसे का बिजली बिल बकाया है। यह राशि इतनी बड़ी है कि इसे सुनकर हर कोई हैरान है और सवाल पूछ रहा है कि आखिर बिजली विभाग की कार्रवाई सिर्फ आम आदमी तक ही क्यों सीमित रहती है।
जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक बिजली बिल बकाया
ग्राम पंचायत नई जल योजना पर 3 करोड़ 77 लाख 78 हजार 321 रुपये 25 पैसे
ग्राम पंचायत सड़क बत्ती पर 30 लाख 40 हजार 270 रुपये 14 पैसे
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 21 लाख 16 हजार 721 रुपये 23 पैसे
जनपद पंचायत विभाग पर 78 हजार 793 रुपये 08 पैसे
गोठान ग्रामीण औद्योगिक पार्क पर 1 लाख 59 हजार 681 रुपये 72 पैसे
नगरीय निकाय नल जल योजना पर 50 लाख 74 हजार 778 रुपये 50 पैसे
नगरीय निकाय सड़क बत्ती पर 23 लाख 49 हजार 595 रुपये 48 पैसे
नगरीय निकाय अन्य मद में 7 लाख 65 हजार 968 रुपये 30 पैसे
महिला एवं बाल विकास विभाग पर 60 हजार 230 रुपये 30 पैसे
स्कूल शिक्षा विभाग पर 1 लाख 96 हजार 232 रुपये 91 पैसे
पुलिस विभाग पर 2 लाख 93 हजार 076 रुपये 78 पैसे
लोगों में शुरु हुई चर्चा

इस भारी भरकम बकाया राशि को लेकर धमधा ब्लॉक में आम लोगों के बीच तीखी चर्चा है। लोगों का कहना है कि अगर कोई गरीब व्यक्ति या छोटा दुकानदार एक या दो महीने बिजली बिल नहीं भर पाए, तो बिजली विभाग के कर्मचारी बिना देर किए कनेक्शन काटने पहुंच जाते हैं। नोटिस, चेतावनी और फिर सीधे बिजली गुल। लेकिन जब सरकारी विभागों और संस्थानों पर करोड़ों रुपये बकाया हो जाते हैं, तब बिजली विभाग की सख्ती कहां चली जाती है।
कांग्रेस ने बिजली बकाए को लेकर उठाए सवाल
मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। कांग्रेस महामंत्री राजीव गुप्ता ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गरीब आदमी अगर एक या दो महीने बिजली बिल नहीं भर पाए तो तुरंत तार काट दिए जाते हैं, लेकिन सिर्फ धमधा ब्लॉक में ही सरकारी विभागों पर करोड़ों का बिजली बिल बकाया है। अगर एक ब्लॉक का यह हाल है, तो पूरे प्रदेश की स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिजली विभाग के नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं और सरकारी विभागों के लिए अलग मापदंड तय किए गए हैं। गुप्ता ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और बिजली विभाग की दोहरी नीति बताया।
बिजली बिल बकाये का मामला बना चर्चा का केंद्र
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों को नियमित बजट मिलता है, फिर भी बिजली बिल का भुगतान नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। इससे न सिर्फ बिजली विभाग को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि आम जनता में यह संदेश भी जा रहा है कि नियम सबके लिए समान नहीं हैं।
फिलहाल धमधा ब्लॉक में बिजली बिल बकाया का यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि बिजली विभाग इन विभागों से बकाया वसूली को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है या फिर कार्रवाई सिर्फ गरीब और आम उपभोक्ताओं तक ही सीमित रह जाती है।