Edited By Himansh sharma, Updated: 31 Jan, 2026 03:13 PM

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में कथित 218 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है।
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में कथित 218 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद विभागीय स्तर पर दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन की कार्रवाई तत्कालीन कार्यालय में पदस्थ वर्ग–2 कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप के खिलाफ की गई है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारियों को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीते तीन वर्षों (2022 से 2025) के दौरान कोषालय से निकाले गए लगभग 218 करोड़ रुपये के लेन-देन को लेकर की गई ऑडिट जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि के दौरान
कैश बुक, वाउचर, बिल रजिस्टर जैसे अहम वित्तीय अभिलेख गायब पाए गए, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई है।
पूर्व बीईओ पर लगे गंभीर आरोप
ऑडिट रिपोर्ट के सामने आने के बाद तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) संजय जायसवाल पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। हालांकि संजय जायसवाल ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को बेगुनाह बताया है।
पूर्व बीईओ संजय जायसवाल का पक्ष
पूर्व बीईओ संजय जायसवाल का कहना है कि—
उनके कार्यकाल में शिक्षकों का वेतन नियमित रूप से भुगतान किया गया। सभी बिल, वाउचर, कैश बुक और वित्तीय दस्तावेज उन्होंने 11 दिसंबर 2025 को वर्तमान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को सौंप दिए थे। दस्तावेज सौंपने की रसीद उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक रहा।
लापरवाही का आरोप कक्ष प्रभारी पर
संजय जायसवाल ने कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनके अनुसार—
योगेंद्र कश्यप को मौखिक और लिखित रूप से कई बार निर्देश दिए गए। इसके बावजूद वित्तीय दस्तावेजों का संधारण ठीक से नहीं किया गया। लापरवाही को लेकर नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी कारण कई वित्तीय अभिलेख अधूरे रह गए।
DEO ने मानी ऑडिट में खामियां
अब आगे क्या?
मामले की विस्तृत विभागीय जांच जारी है। जांच के बाद अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
218 करोड़ की कथित गड़बड़ी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।