Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jan, 2026 10:36 AM

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के शिक्षा विभाग में सामने आया फर्जी नियुक्तियों का मामला अब बड़े प्रशासनिक घोटाले की शक्ल ले चुका है।
खैरागढ। (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के शिक्षा विभाग में सामने आया फर्जी नियुक्तियों का मामला अब बड़े प्रशासनिक घोटाले की शक्ल ले चुका है। जांच में यह साफ हो गया है कि कूटरचित नियुक्ति आदेशों के सहारे कम से कम 9 लोग शासकीय सेवा में घुसे, वर्षों तक नियमित वेतन उठाया और सिस्टम को भनक तक नहीं लगी। मामले के सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अब इसे महज लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित फर्जीवाड़ा मानते हुए कार्रवाई तेज कर दी गई है।
एक फर्जी नियुक्ति से खुला पूरा नेटवर्क
जांच की शुरुआत सहायक ग्रेड 3 के पद पर कार्यरत टीकम चंद साहू से हुई। दस्तावेजों में उनकी नियुक्ति राज्य शिक्षा आयोग रायपुर के नाम से दर्शाई गई थी, लेकिन जैसे ही इसका आधिकारिक सत्यापन कराया गया, पूरी कहानी ही पलट गई। सत्यापन में सामने आया कि जिस आदेश के आधार पर नौकरी की जा रही थी, वह कभी जारी ही नहीं हुआ था। सरकारी रिकॉर्ड ने खोली पोल राज्य स्तर से प्राप्त जवाब में स्पष्ट किया गया कि आदेश क्रमांक 34 दिनांक 09.09.2021 नियुक्ति से संबंधित नहीं है नियुक्ति पत्र पर किए गए हस्ताक्षर मूल अभिलेखों से मेल नहीं खाते प्रस्तुत किया गया आदेश पूर्णतः फर्जी और कूटरचित है इस खुलासे के बाद मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए उच्च स्तर पर रिपोर्ट भेज दी गई।
फर्जी नियुक्ति, फिर भी पदस्थापना और ट्रांसफर
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि नियुक्ति फर्जी होने के बावजूद मंत्रालय स्तर से पदस्थापना आदेश जारी हो गए। इन आदेशों के तहत पदस्थापना इस प्रकार हुई
टीकम चंद साहू - शासकीय हाई स्कूल मोहगांव
फगेन्द्र सिन्हा - शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बकरकट्टा
रजिया अहमद - शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पैलीमेटा
अजहर अहमद - बीईओ कार्यालय छुईखदान
सी एच अन्थोनी अम्मा - शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल ठाकुरटोला
हैरानी की बात यह भी सामने आई कि एक कर्मचारी ने कभी जॉइनिंग ही नहीं दी, फिर भी उसका नाम वर्षों तक शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज रहा।
अब कार्रवाई के घेरे में कई चेहरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फर्जी नियुक्तियों से जुड़े कर्मचारियों के सेवा अभिलेख खंगालने वेतन भुगतान की रिकवरी पर विचार फाइलें आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में विजिलेंस जांच और आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की पूरी संभावना है।
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बिना मूल सत्यापन नियुक्ति कैसे स्वीकार हुई सालों तक वेतन भुगतान किसके आदेश से होता रहा फर्जी दस्तावेजों को वैध किसने माना
यह लापरवाही थी या भीतर तक फैला नेटवर्क
यह मामला सिर्फ फर्जी नियुक्तियों का नहीं, बल्कि शासकीय व्यवस्था में गहरी सेंधमारी का संकेत देता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि कार्रवाई सिर्फ कुछ नामों तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।