Edited By meena, Updated: 25 May, 2026 08:18 PM

राजधानी भोपाल में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के साथ बड़ा धोखा सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक फर्जी भर्ती विज्ञापन वायरल कर युवाओं को भ्रमित किया गया। यह विज्ञापन राष्ट्रीय
भोपाल (इजहार खान) : राजधानी भोपाल में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के साथ बड़ा धोखा सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक फर्जी भर्ती विज्ञापन वायरल कर युवाओं को भ्रमित किया गया। यह विज्ञापन राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR), भोपाल के नाम से जारी किया गया था, जिसमें कई शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए भर्ती होने का दावा किया गया था।
विज्ञापन में दावा किया गया था कि 25 मई 2026 को वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित होगा और कुल 22 पदों पर भर्ती की जाएगी। सोशल मीडिया पर इसे अखबार में प्रकाशित विज्ञप्ति बताकर तेजी से शेयर किया गया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दस्तावेज लेकर संस्थान पहुंच गए, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि संस्थान की ओर से ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया जारी ही नहीं की गई है।
इन पदों पर भर्ती का किया गया दावा
फर्जी विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, अकाउंटेंट, लाइब्रेरी एवं इंफॉर्मेशन असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट, लैब असिस्टेंट, जूनियर असिस्टेंट और मल्टी-टास्किंग स्टाफ समेत कई पद शामिल थे।

विज्ञापन के अनुसार
- असिस्टेंट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस) – 3 पद
- असिस्टेंट प्रोफेसर (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) – 2 पद
- असिस्टेंट प्रोफेसर (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) – 2 पद
- एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर – 1 पद
- अकाउंटेंट – 1 पद
- लाइब्रेरी एवं इंफॉर्मेशन असिस्टेंट – 1 पद
- टेक्निकल असिस्टेंट – 2 पद
- लैब असिस्टेंट – 3 पद
- जूनियर असिस्टेंट – 2 पद
- मल्टी-टास्किंग स्टाफ – 3 पद
संस्थान ने बताया पूरी तरह फर्जी
जब अभ्यर्थियों की भीड़ संस्थान पहुंची तो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि NITTTR भोपाल द्वारा ऐसा कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। संस्थान ने इस वायरल भर्ती विज्ञापन को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया।सूत्रों के मुताबिक किसी अज्ञात व्यक्ति या शरारती तत्व ने संस्थान के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर यह फर्जी विज्ञापन तैयार किया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

युवाओं में नाराजगी
कई अभ्यर्थी दूर-दराज जिलों से भोपाल पहुंचे थे। नौकरी मिलने की उम्मीद लेकर आए युवाओं को जब सच्चाई पता चली तो उनमें नाराजगी और निराशा देखने को मिली। कुछ अभ्यर्थियों ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
साइबर जांच की मांग
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि इस तरह के फर्जी विज्ञापन युवाओं को मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि किसी भी भर्ती विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित सूचना स्रोतों से पुष्टि जरूर करें। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विज्ञापनों को बिना जांचे साझा न करें।