Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Jul, 2026 12:32 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर जारी है।
आगर मालवा। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर जारी है। भारतीय जनता पार्टी में सामने आई अंदरूनी खींचतान की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी खुली गुटबाजी और असंतोष के आरोपों के कारण सुर्खियों में आ गई है। सुसनेर से कांग्रेस विधायक भेरू सिंह परिहार ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उनके तीखे बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
विधायक भेरू सिंह परिहार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ बड़े नेता ही नहीं चाहते कि मध्य प्रदेश में पार्टी की सरकार बने। उनका कहना था कि यदि संगठन में लगातार ऐसी ही परिस्थितियां बनी रहीं और कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी होती रही, तो उन्हें पार्टी छोड़ने जैसे विकल्प पर भी विचार करना पड़ सकता है। विधायक के इस बयान को कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस अभी तक पूरी तरह संगठनात्मक मजबूती हासिल नहीं कर सकी है। ऐसे में पार्टी के भीतर से आने वाले इस तरह के बयान नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं। खासकर तब, जब प्रदेश संगठन को मजबूत करने की कवायद लगातार जारी है।
उधर, विधायक के बयान के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजयलक्ष्मी तंवर ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक अनुशासित संगठन है और यदि किसी नेता या विधायक को कोई शिकायत है तो उसे सार्वजनिक मंच या मीडिया के बजाय पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और सभी विवाद तय प्रक्रिया के तहत बंद कमरे में बैठकर सुलझाए जाने चाहिए। सार्वजनिक बयानबाजी से संगठन की छवि प्रभावित होती है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भाजपा के बाद अब कांग्रेस में भी सामने आई यह अंदरूनी कलह मध्य प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ देती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और विधायक के बयान पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं।