Edited By Himansh sharma, Updated: 17 Jul, 2026 12:02 PM

मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति लगभग अंतिम रूप दे दिया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति लगभग अंतिम रूप दे दिया है। विपक्ष इस बार सदन में बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, सरकारी भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी-दलित अधिकारों और कथित भूमि विवाद जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। इन विषयों पर कांग्रेस विधायक दल की रणनीति तय करने के लिए 19 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बैठक बुलाई है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में विधानसभा सत्र के दौरान उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि प्रदेश में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को प्रमुखता से सदन में रखा जाए। पार्टी सरकारी नौकरियों के लिए वार्षिक जॉब कैलेंडर जारी करने, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और युवाओं को समयबद्ध रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाएगी।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि कांग्रेस जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती के साथ विधानसभा में उठाएगी। उनके अनुसार प्रदेश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, केन-बेतवा परियोजना से जुड़े विषयों के साथ आदिवासियों और दलितों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं, जिन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा।
वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में पशुपालन विभाग मुख्यमंत्री के पास आने के फैसले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल विभाग बदलने से व्यवस्थाओं में सुधार हो जाएगा। पटवारी का कहना है कि जिन विभागों की जिम्मेदारी पहले से मुख्यमंत्री के पास है, वहां भी जनता अपेक्षित परिणाम महसूस नहीं कर रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में गौशालाओं की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। चारे, पानी, उपचार और आवश्यक संसाधनों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में पशुपालन विभाग सीधे मुख्यमंत्री के पास आने के बाद सरकार की जवाबदेही और अधिक बढ़ गई है।
अब सभी की निगाहें 19 जुलाई को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक और उसके बाद शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रोजगार, भ्रष्टाचार, किसानों और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।