Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Jul, 2026 05:45 PM

मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत जारी कारण बताओ नोटिस अब संगठन के भीतर बड़े विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने नोटिस का जवाब देने के बजाय संगठन प्रभारी एवं प्रदेश महासचिव संजय कांबले की अधिकार-सीमा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो वे मानहानि का मुकदमा दायर करने के लिए बाध्य होंगी।
यह पूरा विवाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर सोशल मीडिया पर हुई एक विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। पार्टी की ओर से अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए निधि चतुर्वेदी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि इस कार्रवाई ने मामला शांत करने के बजाय संगठन के भीतर नए टकराव को जन्म दे दिया।
अधिकार को लेकर उठाए सवाल
निधि चतुर्वेदी ने संगठन प्रभारी को भेजे अपने जवाबी पत्र में कहा है कि संगठन में दोनों का पद महासचिव स्तर का है। ऐसे में समान स्तर का पदाधिकारी किसी दूसरे महासचिव को नोटिस किस अधिकार से जारी कर सकता है? उन्होंने यह भी पूछा कि इस कार्रवाई का संगठन के संविधान और नियमों में क्या आधार है। उनके अनुसार, जब तक इसका स्पष्ट उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक नोटिस की वैधता भी सवालों के घेरे में रहेगी।
सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप
विवाद का दूसरा बड़ा पहलू नोटिस के सार्वजनिक होने को लेकर सामने आया है। निधि चतुर्वेदी का आरोप है कि नोटिस उन्हें व्यक्तिगत रूप से सौंपने के बजाय सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि यदि यह जानबूझकर किया गया है तो यह केवल संगठनात्मक प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं, बल्कि उनकी मानहानि का भी मामला बनता है।
सात दिन का समय, फिर कानूनी कार्रवाई
अपने पत्र में निधि चतुर्वेदी ने संजय कांबले से सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने की मांग की है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी और मानहानि सहित अन्य उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगी।
कांग्रेस के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती
मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच मतभेद और सार्वजनिक बयानबाजी पहले भी कई बार सुर्खियां बटोर चुकी है, लेकिन इस बार मामला सीधे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी तक पहुंच गया है। संगठन के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच खुला टकराव पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और केंद्रीय आलाकमान पर हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और अनुशासन तथा संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर क्या रुख अपनाते हैं..