Edited By meena, Updated: 24 Oct, 2022 12:33 PM

दीवाली के एक दिन पूर्व श्मशान में जलती चिताओ के बीच दिवाली मनाने की अनोखी परंपरा चर्चाओं में है, एक तरफ जलती चिताएं और दूसरी तरफ परिवार सहित बच्चे बुढ़े महिलाएं दीप जलाते हुए आतिशबाजी करते नजर आते हैं।
रतलाम(समीर खान): दीवाली के एक दिन पूर्व श्मशान में जलती चिताओ के बीच दिवाली मनाने की अनोखी परंपरा चर्चाओं में है, एक तरफ जलती चिताएं और दूसरी तरफ परिवार सहित बच्चे बुढ़े महिलाएं दीप जलाते हुए आतिशबाजी करते नजर आते हैं।

दरअसल यह नजारा मप्र के रतलाम जिले का है जहां त्रिवेणी मुक्तिधाम में अनोखी दिवाली मनाई जाती है। वैसे तो रात में श्मशान में जाने में हर कोई कतराता है लेकिन यहा दीपावली के मौके पर रूप चौदस के दिन रतलाम के इस मुक्तिधाम में हर्षोल्लास के साथ महिलाएं और छोटे बच्चे दीपावली मनाते हुए नजर आते हैं। प्रेरणा संस्था से जुड़े सैकड़ों लोग यहां दीपदान करने और पूर्वजों को याद करने पहुंचते हैं। रूप चौदस की शाम त्रिवेणी मुक्तिधाम में अलग ही नजारा देखने को मिलता है, यहां लोग दीप जलाते है और रंगोली बनाकर ढोल-बाजे और आतिशबाजी के साथ दीपावली मनाई जाती है।

प्रेरणा संस्था के गोपाल सोनी बताते है कि हम 5 लोगों ने 2006 में इसकी शुरुआत की थी। जिसके बाद धीरे-धीरे लोग इस दीपदान कार्यक्रम से जुड़ते गए और अब बड़े स्तर पर मुक्तिधाम में दिवाली मनाने लोग परिवार के साथ आते है।

बच्चे-बूढ़े परिवार के साथ श्मशान घाट में मनाते हैं दिवाली
वैसे तो श्मशान घाट में महिलाओं और बच्चों को नहीं लाया जाता है। श्मशान का नाम आते ही लोगों के दिमाग की सोच बदल जाती है। गमजदा माहौल और रोते-बिलखते परिजनों का दृश्य दिखाई देता है। रूप चौदस के मौके पर इसी मुक्तिधाम में खुशियों और उत्साह के साथ महिलाएं और छोटे बच्चे भी दीप जलाकर आतिशबाजी करने आते हैं।