Edited By meena, Updated: 06 Feb, 2026 04:15 PM

सिंगरौली जिले में कोल ब्लॉक और हाथी कॉरिडोर विवाद गहराता जा रहा है। धीरे धीरे इस मामले में सियासी रंगत चढ़ती नजर आ रही है...
सिंगरौली : सिंगरौली जिले में कोल ब्लॉक और हाथी कॉरिडोर विवाद गहराता जा रहा है। धीरे धीरे इस मामले में सियासी रंगत चढ़ती नजर आ रही है। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
विक्रांत भूरिया ने कहा कि सिंगरौली के बासी बेरदहा क्षेत्र में कोयला उत्पादन के नाम पर जंगलों की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है, जिससे न केवल पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि शुरुआती सरकारी दस्तावेज़ों और IFS अधिकारियों की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज था कि यह क्षेत्र हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है। लेकिन बाद में वीकली प्लान और रिपोर्ट में बदलाव कर हाथी कॉरिडोर को कोल ब्लॉक क्षेत्र से बाहर दिखाया गया। उनका दावा है कि यह बदलाव खनन को मंजूरी दिलाने के उद्देश्य से किया गया।
कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता का आरोप
विक्रांत भूरिया ने कहा कि देश को ऊर्जा देने वाले सिंगरौली में जंगल, वन्यजीव और आदिवासी हितों की अनदेखी कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले के दस्तावेज़ हाथी गलियारे की पुष्टि करते हैं, तो बाद की रिपोर्ट किस आधार पर बदली गई?
नियमों के उल्लंघन का दावा
कांग्रेस विधायक ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि हाथी कॉरिडोर क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई है, तो यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पर्यावरणीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। वहीं, इस मामले में सिंगरौली वन विभाग के एसडीओ नरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि कोल खदान से हाथी कॉरिडोर प्रभावित नहीं हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
क्या कोल ब्लॉक के लिए हाथी कॉरिडोर की सीमाएं बदली गईं? और अगर ऐसा हुआ, तो इस कथित हेरफेर के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी