बागेश्वर धाम में हल्दी कार्यक्रम में CM मोहन और पंडित धीरेंद्र की अठखेलियां,एक-दूसरे के लगाई हल्दी, खूब समा बांधा

Edited By Desh Raj, Updated: 13 Feb, 2026 11:24 PM

cm mohan and pandit dhirendra s antics at the haldi ceremony in bageshwar dham

बागेश्वर धाम में बुंदेलखंड के महाकुंभ के रूप में 300 बेटियों का विवाह हो रहा है। शुक्रवार को हल्दी की रस्म की गई। प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने बागेश्वर धाम आकर मंडप का पूजन किया। पूजन के पश्चात बागेश्वर महाराज ने मुख्यमंत्री को हल्दी लगाकर...

छतरपुर (राजेश चौरसिया): बागेश्वर धाम में बुंदेलखंड के महाकुंभ के रूप में 300 बेटियों का विवाह हो रहा है। शुक्रवार को हल्दी की रस्म की गई। प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने बागेश्वर धाम आकर मंडप का पूजन किया। पूजन के पश्चात बागेश्वर महाराज ने मुख्यमंत्री को हल्दी लगाकर महोत्सव की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने महाराज श्री को हल्दी लगाई। इस दौरान माहौल काफी अलग तरह का दिखाई दिया। हल्दी रस्म के दौरान बागेश्वर धाम सरकार और मोहन यादव काफी अठखेलियां करते दिखे।  

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मुख्यमंत्री ने सभी बेटियों के  सुखमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवस्थान संस्कारों को देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज सभी धार्मिक स्थलों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराज श्री के सभी प्रकल्प हम सबको गौरवान्वित करते हैं। क्षेत्रीय विधायक अरविंद पटैरिया ने सबका स्वागत किया। हल्दी महोत्सव के अवसर पर पधारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वैदिक मंत्रोच्चार और वैदिक परंपरा के अनुरूप बेटियों के मंडप का पूजन किया। वहीं बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को स्मृति चिन्ह के रूप में हल भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

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मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि बागेश्वर धाम की देश दुनिया में अलग प्रसिद्धि है। उन्होंने कहा कि समस्त देव स्थान चमत्कारिक हैं। 16 संस्कारो में विवाह संस्कार का व्यापक एवं अलग महत्व है। उन्होंने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा हिन्दुत्व एवं सनातन संस्कृति के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस मुहिम में सभी सनातनी लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1000 साल बाद अब सोमनाथ मंदिर को भी नई पहचान मिली है। अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। सरकार पूरे संकल्प के साथ पीठाधीश्वर के परोपकारी कार्यों में साथ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी महाशिवरात्रि पर्व पर 3 हजार कन्याओं का विवाह हो, ऐसी आशा और उम्मीद है। इसके अलावा तीन अबूझ मुहूर्त बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तय तिथियों पर सामूहिक विवाह आयोजन पर प्रत्येक कन्याओं को 51-51 हजार रूपए के लाभ प्रदान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाहिक कार्यक्रम से अनावश्यक खर्च पर रोक के साथ अलग आनंद की अनुभूति होती है। इससे समाज को अच्छा और सकारात्मक संदेश भी मिलता है। इसलिए सक्षम लोगों को भी इस पुनीत कार्य में आगे आना चाहिए। मृत्यु अवसरों पर भी दिखावे की प्रवृत्ति से लोगों को बचना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने गरीब कन्याओं के वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने के अवसर को सौभाग्य का क्षण बताया और कहा कि इसका साक्षी बनकर मन प्रफुल्लित है। इस भव्य और दिव्य आयोजन में शामिल नवदंपत्तियों को रोजगार का अवसर प्रदान करने के लिए भी कहा। स्थानीय विधायक अरविंद पटेरिया ने स्वागत उद्बोधन दिया और सिद्ध पीठ के माध्यम से विभिन्न कल्याणकारी सेवाओं की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में संतगण, सांसद विष्णुदत्त शर्मा सहित पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, विधायक छतरपुर ललिता यादव, बिजावर विधायक राजेश शुक्ला, पूर्व विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी, पूर्व नपाध्यक्ष अर्चना सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों में डीआईजी विजय खत्री, कलेक्टर पार्थ जैसवाल, पुलिस अधीक्षक अगम जैन, जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

राष्ट के साथ संत, महंत और धर्म के लिए काम कर रहे सीएम: बागेश्वर महाराज

बागेश्वर महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ऐसे राजनेता है जो राष्ट्र के साथ संत, महंत और धर्म को साथ लेकर चल रहे हैं। महाराज श्री ने कहा कि गौ मंदिर का काम और मंदिरों के स्थानीय न्यासों पर मुख्यमंत्री विशेष ध्यान दे रहे हैं। प्रदेश के मुखिया का सहयोग मिलने से धार्मिक संस्थान और बेहतर ढंग से सनातन के लिए कार्य कर पाते हैं।

महाराज श्री ने किया समरसता भोज

मंचीय कार्यक्रम के बाद बागेश्वर महाराज ने सभी समाजों के साथ बैठकर समरसता भोज किया। बागेश्वर महाराज के अलावा देश के जाने-माने कथा वाचक, महापुरुष और संत भी इसमें शामिल हुए। समरसता भोज के माध्यम से सबको यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि हम सब एक हैं। आपसी छुआछूत और ऊंच नीच का भाव समाज में दरार पैदा करता है इसलिए हम सब सिर्फ सनातनी बने रहे।

 

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