Edited By meena, Updated: 20 Feb, 2026 01:03 PM

मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में आमातारा स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के दौरान 58 वर्षीय भृत्य रामभुवन पाठक की हार्ट अटैक से मौत हो गई...
सतना : मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में आमातारा स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के दौरान 58 वर्षीय भृत्य रामभुवन पाठक की हार्ट अटैक से मौत हो गई। यह दुखद घटना सुबह लगभग 8 बजे की है, जब वे परीक्षा केंद्र पर अपनी जिम्मेदारी निभाने की तैयारी कर रहे थे। अचानक सीने में तेज दर्द उठने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और बाद में अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
परीक्षा ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत
रामभुवन पाठक लटागांव के निवासी थे और गांव से लगभग 8 किलोमीटर दूर आमातारा स्कूल में कई वर्षों से भृत्य पद पर कार्यरत थे। 19 फरवरी को 10वीं बोर्ड की संस्कृत विषय की परीक्षा आयोजित थी। वे सुबह समय से पहले स्कूल पहुंच गए थे। ड्यूटी के दौरान अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा। उन्होंने तुरंत परिजनों और रिश्तेदारों को सूचना दी। पास में रहने वाले उनके बहनोई सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बेटे को जानकारी दी। उन्हें तत्काल गांव के चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां जांच में ब्लड प्रेशर काफी लो पाया गया। स्थिति गंभीर होने के बावजूद वे परीक्षा ड्यूटी के कारण केंद्र नहीं छोड़ पाए और अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे।
अवकाश पत्र के बाद अस्पताल पहुंचे, लेकिन नहीं बची जान
सुबह करीब 8:30 से 8:50 बजे के बीच केंद्राध्यक्ष देवेंद्र कुमार वर्मा और सहायक केंद्राध्यक्ष अमित कुमार भट्ट के पहुंचने के बाद रामभुवन से माध्यमिक शिक्षा मंडल के नाम अवकाश पत्र लिखवाया गया। इसके बाद ही वे ड्यूटी से मुक्त हो सके। हालांकि तब तक उनकी तबीयत और बिगड़ चुकी थी। उन्हें एंबुलेंस से मैहर सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार ने स्वेच्छा से पोस्टमार्टम नहीं कराया। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को गांव में किया जाएगा।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
रामभुवन के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मंडल के नियम-कायदों के कारण अस्पताल ले जाने में देरी हुई। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने परीक्षा ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव और जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात-दिन की ड्यूटी बनी वजह
स्कूल कर्मचारियों के अनुसार, बोर्ड परीक्षा के दौरान रामभुवन को दिन और रात दोनों समय ड्यूटी करनी पड़ रही थी। आमातारा स्कूल में दो ही भृत्य पदस्थ हैं — रामभुवन पाठक और उमेश कुमार वर्मन। दोनों को बारी-बारी से ड्यूटी करनी होती थी। बताया गया कि परीक्षा कार्य में उनकी लगन और सहयोग के कारण केंद्राध्यक्ष ने रात की ड्यूटी के बाद उन्हें दिन में भी बुला लिया था। दुर्भाग्यवश वही ड्यूटी उनकी आखिरी साबित हुई। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों पर गंभीर विचार की आवश्यकता भी दर्शाती है।