Edited By meena, Updated: 30 Aug, 2025 04:25 PM

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में गूगल मैप से रास्ता देख कर जा रहे दो युवकों की कार उफनती नदी में जा फंसी...
बैतूल (रामकिशोर पवार) : मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में गूगल मैप से रास्ता देख कर जा रहे दो युवकों की कार उफनती नदी में जा फंसी। हादसा शुक्रवार देर रात का है। कार को डूबता देख ग्रामीणों ने सूझबूझ से काम लिया और बिना देरी किए पुलिस को सूचना दी। घटना चोपना थाना क्षेत्र की है। जहां दो युवक सारणी निवासी कबीर सिंदूर (26) और हंसराज सिंदूर (27) अपनी कार से गूगल नेविगेशन की मदद से ग्राम नारायणपुर देवी जागरण कार्यक्रम में जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने उफनती नदी पर बने रपटे को पानी कम समझकर पार करने की कोशिश की। तभी गाड़ी का एक चक्का पुलिया से उतर गया और देखते ही देखते कार बहाव में बहने लगी। कार के बहने की सूचना ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को दी।
खबर मिलते ही थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से कार में फंसे दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने बताया कि कार को पानी का बहाव कम होने पर बाहर निकाला जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर सावधानी बरतने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उल्लेखनीय है कि बैतूल के पुलिस अधीक्षक श्री निश्चल एन. झारिया ने बरसात के मौसम को देखते हुए सभी थाना प्रभारियों को सतर्कता बढ़ाने, नदी-नालों एवं रपटों पर सुरक्षा पुख्ता करने और आमजन को जागरूक करने के निर्देश पहले ही दे रखे हैं।

कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में बह गई थी, जिसमें सवार पांच लोगों में से तीन को चोपना पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू किया था। उस घटना के बाद पुलिस और ग्रामीणों को सम्मानित भी किया गया था। पुलिस की तत्परता और स्थानीय सहयोग से एक बार फिर दो अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकीं।

इस अभियान में पुलिस स्टाफ एएसआई राजेश कलम, एएसआई बलिराम बमनेले, एएसआई विनोद इवने और आरक्षक कमलेश उयके के साथ ग्रामीण गोताखोर दिलीप घरामी, शंकर सिकदार, चितरंजन सिकदार, सत्तोंजीत घरामी व अभिषेक सिकदार ने अहम भूमिका निभाई। कुछ दिन पहले भी इसी इलाके में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित पांच लोग नदी में बह गए थे। उस दौरान भी चोपना पुलिस और ग्रामीणों ने तीन लोगों को बचाने में सफलता हासिल की थी। पुलिस अधीक्षक बैतूल निश्चल एन. झारिया ने उस साहसिक कार्य पर पूरी टीम को सम्मानित किया था।