अनोखा अधूरा शिव मंदिर, जिसे बनाते बनाते पत्थर बने गए थे कारीगर! दर्शन मात्र से पूरी होती है हर मनोकामना

Edited By meena, Updated: 14 Feb, 2026 08:01 PM

siddheshwar nath mahadev temple in betul madhya pradesh

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के भैंसदेही में पूर्णा नदी के पवित्र तट पर स्थित प्राचीन सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर इन दिनों महाशिवरात्रि को लेकर विशेष आस्था और उत्साह का केंद्र बना...

बैतूल : मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के भैंसदेही में पूर्णा नदी के पवित्र तट पर स्थित प्राचीन सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर इन दिनों महाशिवरात्रि को लेकर विशेष आस्था और उत्साह का केंद्र बना हुआ है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी रहस्यमयी किंवदंती, अधूरे निर्माण और चमत्कारी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिसे लेकर मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। इस मंदिर से जुड़ी सबसे रोचक और भावनात्मक कथा इसके अधूरे निर्माण की है।

लोक मान्यताओं के अनुसार 11वीं और 12वीं सदी के मध्य भैंसदेही क्षेत्र महिष्मति नगरी के नाम से जाना जाता था, जहां रघुवंशी राजा गय का शासन था। भगवान शिव के परम भक्त राजा गय ने यहां एक भव्य शिव मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया और इसके लिए प्रसिद्ध वास्तुकार भाई नागर और भोगर को जिम्मेदारी सौंपी। कहा जाता है कि दोनों भाइयों में अछ्वुत निर्माण क्षमता थी और वे अल्प समय में विशाल संरचनाएं खड़ी कर देते थे। लेकिन उनके जीवन से एक श्राप जुड़ा हुआ था। मान्यता थी कि यदि कोई उन्हें निर्माण करते समय नग्न अवस्था में देख लेगा, तो वे पत्थर के बन जाएंगे। मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा था, तभी एक रात उनकी बहन भोजन लेकर वहां पहुंच गई और अनजाने में उसने दोनों भाइयों को देख लिया। श्राप के प्रभाव से दोनों भाई पत्थर की मूर्तियों में बदल गए और मंदिर का निर्माण हमेशा के लिए अधूरा रह गया। मंदिर का ऊपरी शिखर आज भी अधूरा है, जो इस किंवदंती की सच्चाई की याद दिलाता है।

मंदिर का स्थापत्य और संरचना भी अत्यंत अछ्वुत है। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग को उप ज्योतिर्लिंग के रूप में मान्यता प्राप्त है। गर्भगृह के सामने स्थापित नंदी की प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है, जिसे ठोंकने पर धातु जैसी खनक सुनाई देती है। मंदिर की बनावट इस प्रकार की गई है कि सूर्य की पहली किरण और पूर्णिमा के चंद्रमा की रोशनी सीधे शिवलिंग पर पड़ती है, जो श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभव होता है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा। इस दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगना शुरू हो जाती हैं और भक्त जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूरी रात मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंजता रहता है। केवल महाशिवरात्रि ही नहीं, बल्कि हर सोमवार को भी यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन माह और शिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। मंदिर समिति द्वारा महाशिवरात्रि के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल और सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। 

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