Edited By meena, Updated: 30 Apr, 2026 05:23 PM

मध्य प्रदेश में भाजपा ने आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। निगम मंडल, विकास प्राधिकरण और आयोग अध्यक्षों के साथ अब जल्द ही भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति की...
भोपाल: मध्य प्रदेश में भाजपा ने आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। निगम मंडल, विकास प्राधिकरण और आयोग अध्यक्षों के साथ अब जल्द ही भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा हो सकती है। सूत्रों की मानें तो कार्यसमिति के गठन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और इसके जल्द घोषित होने की संभावना है। इस बार संगठन में सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके चलते दलित और आदिवासी वर्ग के नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के संकेत हैं।
भाजपा की आगामी महत्वपूर्ण बैठक मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ओरछा में आयोजित की जाएगी। इस बैठक को लेकर पार्टी ने पहले ही घोषणा कर दी है और स्थानीय नेताओं को तैयारियों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। माना जा रहा है कि कार्यसमिति के गठन के बाद ही इस बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला मोर्चा की कार्यकारिणी में भी इन वर्गों को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में अधिकतम 120 सदस्य हो सकते हैं, जबकि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में यह संख्या आमतौर पर 100 से अधिक रहती है। नई प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 106 सदस्य शामिल होंगे, जिनमें 35 महिलाएं होंगी। इनमें से 9 सदस्य अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से होंगी। इसके अतिरिक्त 26 विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाए जाएंगे, जबकि जिला प्रभारियों को भी कार्यसमिति में स्थान दिया जाएगा। हालांकि इसकी आधिकारिक सूचना नहीं हुई है।
प्रदेश में वर्तमान में 65 संगठनात्मक जिले हैं और नई कार्यसमिति में नए चेहरों के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का खास ध्यान रखा जाएगा। कार्यसमिति की बैठक हर तीन महीने में आयोजित की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, नई कार्यसमिति में कुछ वरिष्ठ नेताओं की वापसी हो सकती है, वहीं 2023 के चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा के भीतर संगठनात्मक हलचल और तेज होने की संभावना है।