Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Jun, 2026 12:58 PM

मुख्यमंत्री ने आगामी वर्ष के लिए पूरी तरह ‘परफॉर्मेंस बेस्ड ट्रांसफर पॉलिसी’ तैयार करने के संकेत दिए हैं।
भोपाल: मध्यप्रदेश की तबादला व्यवस्था में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए साफ संदेश दिया है कि अब सरकारी दफ्तरों में सिर्फ वरिष्ठता या राजनीतिक पहुंच नहीं, बल्कि कामकाज का प्रदर्शन भी मायने रखेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद भी उसी स्थान पर रखा जा सकता है, जबकि कमजोर कार्यप्रणाली वाले कर्मचारियों को छह महीने के भीतर भी हटाया जा सकेगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रदेश में तबादलों से प्रतिबंध हटे लगभग दो सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन अधिकांश विभागों में तबादलों की प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है। पारदर्शिता के दावों के बावजूद विभागों ने खाली पदों की जानकारी तक सार्वजनिक नहीं की, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने आगामी वर्ष के लिए पूरी तरह ‘परफॉर्मेंस बेस्ड ट्रांसफर पॉलिसी’ तैयार करने के संकेत दिए हैं। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो सरकारी कर्मचारियों के लिए केवल समय पूरा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अपने कार्य का परिणाम भी दिखाना पड़ेगा।
दूसरी ओर, कई विभागों में तकनीकी और प्रशासनिक अव्यवस्था भी सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग का ऑनलाइन पोर्टल सही ढंग से काम नहीं कर रहा, स्वास्थ्य विभाग में हजारों आवेदन लंबित हैं और कुछ विभागों में मंत्रियों की सहमति के बिना तबादले किए जाने की शिकायतें भी मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का नया संदेश स्पष्ट है, प्रदेश में अब तबादलों का आधार सिफारिश नहीं, बल्कि प्रदर्शन होना चाहिए। हालांकि इस नीति की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इसे जमीन पर कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ लागू कर पाती है।